Tuesday, August 18, 2020

5 steps 3 days Formula - to beat Corona or any Influenza like illness without any Medicine



1. Mustard oil pulling in the morning 

Put one tablespoon of mustard oil in your mouth and swish it around in your mouth for 15–20 minutes. Be careful not to swallow any. Spit the oil into a trash can once you're done and then rinse your mouth 2-3 times with plain water. Do not brush your teeth immediately after oil pulling instead you can brush your teeth in the night before sleep. repeat mustard oil pulling in the morning for 3 consecutive days. Mustard oil has antibacterial, antifungal, and antiviral properties.

2. Salt  bath


After oil pulling takes a salt bath. Take one full table-spoon common salt  /Epsom salt/rock salt in appx 4 liters of water in a bucket. Take bath with this saltwater. After bath don't rub your body vigorously with a towel. Wear loose clothes after bath over the wet body. Salt has antiseptic, detoxifying, and cleansing properties. 


3. Hot tea 

Take ginger+ black paper tea twice a day and green tea with ginger and lemon once every day for 3 days


4. Massage feet soles 



Apply Vicks vaporub/volini/omnigel/ any pain-relieving ointment on your feet  (including your soles and between fingers) and massage your feet (including soles).  Massage up to the ankles and immediately wear woolen socks for 1 hour. After one hour you may remove the socks. Repeat this process at least thrice daily for three days consecutively.


5. Drink only normal/lukewarm water 


Drink only normal water for three days and avoid any cold or chilled food items for 3 days. If possible avoid animal-dairy-processed food products of 3 days.

Within 3 days automatically you will get rid of symptoms of fever, fatigue, cough, sore throat, etc, and fully cured of influenza, running nose, sneezing,  fever, cough-cold, allergic rhinitis, flu, corona, etc.

   
Important points to remember .......Immediately  follow  5 steps remedial formula for 3 consecutive days as soon as  you face following symptoms 


common symptoms

fever

dry cough

tiredness

Less common symptoms:


aches and pains

sore throat

diarrhea

conjunctivitis

headache

loss of taste or smell

a rash on the skin, or discoloration of fingers or toes

Serious symptoms:

difficulty breathing or shortness of breath

chest pain or pressure

loss of speech or movement 


 5 steps 3 days formula
  1. Mustard oil  pulling in the morning, empty stomach --- once, for 3 days 
  2. Salt bath in morning - once, for 3 days 
  3. Drinking tea three times a day, normal tea with ginger+ black paper twice and green tea with ginger + lemon once .... thrice, 3 days 
  4. Rubbing Vicks vaporub/ omni gel/ volini ointment on feet soles ...... thrice, 3 days 
  5. Drinking only normal water and not taking chilled / cold /animal/dairy/processed food items for 3 days. 

Wednesday, August 12, 2020

New Education Policy 2020 (नई शिक्षा नीति-2020)

New Education Policy 2020: All you need to know | India News ...

कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति (New Education Policy 2020) को हरी झंडी दे दी है. 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है. नई शिक्षा नीति की उल्लेखनीय बातें सरल तरीके की इस प्रकार हैं: 

----5 Years Fundamental---
1.  Nursery    @4 Years 
2.  Jr KG        @5 Years
3.  Sr KG        @6 Years
4.  Std 1st     @7 Years 
5.  Std 2nd    @8 Years

---- 3 Years Preparatory---
6.  Std 3rd     @9 Years 
7.  Std 4th     @10 Years 
8.  Std 5th     @11 Years 

----- 3 Years Middle---
9.  Std 6th     @12 Years 
10.Std 7th     @13 Years 
11.Std 8th     @14 Years

---- 4 Years Secondary---
12.Std 9th     @15 Years 
13.Std SSC    @16 Years 
14.Std FYJC  @17Years 
15.STD SYJC @18 Years 

खास बातें :

----केवल 12वीं क्‍लास में होगा बोर्ड। कॉलेज की डिग्री 4 साल की।10वीं बोर्ड खत्‍म। MPhil भी होगा बंद।

---- अब 5वीं तक के छात्रों को मातृ भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में ही पढ़ाया जाएगा. बाकी विषय चाहे वो अंग्रेजी ही क्यों न हो, एक सब्जेक्ट के तौर पर पढ़ाया जाएगा।
 
----अब सिर्फ 12वींं में बोर्ड की परीक्षा देनी होगी. जबकि इससे पहले 10वी बोर्ड की परीक्षा देना अनिवार्य होता था, जो अब नहीं होगा।

----9वींं से 12वींं क्लास तक सेमेस्टर में परीक्षा होगी. स्कूली शिक्षा को 5+3+3+4 फॉर्मूले के तहत पढ़ाया जाएगा (ऊपर का टेबल देखें)।

----कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी. यानि कि ग्रेजुएशन के पहले साल पर सर्टिफिकेट, दूसरे साल पर डिप्‍लोमा, तीसरे साल में डिग्री मिलेगी।

----3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं लेना है. वहीं हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी. 4 साल की डिग्री करने वाले स्‍टूडेंट्स एक साल में  MA कर सकेंगे।

---अब स्‍टूडेंट्स को  MPhil नहीं करना होगा. बल्कि MA के छात्र अब सीधे PHD कर सकेंगे.

----स्‍टूडेंट्स बीच में कर सकेंगे दूसरे कोर्स. हायर एजुकेशन में 2035 तक ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 50 फीसदी हो जाएगा. वहीं नई शिक्षा नीति के तहत कोई छात्र एक कोर्स के बीच में अगर कोई दूसरा कोर्स करना चाहे तो पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक लेकर वो दूसरा कोर्स कर सकता है. 

----हायर एजुकेशन में भी कई सुधार किए गए हैं. सुधारों में ग्रेडेड अकेडमिक, ऐडमिनिस्ट्रेटिव और फाइनेंशियल ऑटोनॉमी आदि शामिल हैं. इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कोर्स शुरू किए जाएंगे. वर्चुअल लैब्स विकसित किए जाएंगे. एक नैशनल एजुकेशनल साइंटफिक फोरम (NETF) शुरू किया जाएगा. बता दें कि देश में 45 हजार कॉलेज हैं.

----सरकारी, निजी, डीम्‍ड सभी संस्‍थानों के लिए होंगे समान नियम।

 (This new education policy will be implemented from  2021-22  session onward  )

Monday, August 3, 2020

विभाजित संपत्ति और अविभाजित जिम्मेदारियां

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आज हमारे भारतीय समाज में थोक के भाव बहनों ने भाईयों के ऊपर पैतृक सम्पति को लेकर कोर्ट केस किया हुआ हैं. हमारे समाज में जहाँ सगे भाईयों और गोतिया में सम्पति के बंटवारे को लेकर तलवारें खिंची रहती हैं वहां बहनों का यह एलाने- जंग कुछ गंभीर मुद्दों को उठता हैं. यह मुद्दा जहाँ वैधानिक ,सामाजिक और आर्थिक हैं वहीँ इसके मनोवैज्ञानिक पहलूओं पर भी नज़र डालनी चाहिए.

 

कुछ एक साल पहले हमारे भारतीय समाज़ की एक नव-विवाहित लड़की ने बहुत महत्पूर्ण सवाल उठायाथा.उस लड़की का विवाह एक अत्यंत प्रतिष्टित परिवार में हुआ था. ससुराल में सास ससुर के अलावा उसकी पांच ननदें थी. विवाह के कुछ समय पश्चात ही ननदों ने मायके में पूर्वजों की पैतृक सम्पति पर अपना अधिकार माँगा. सास- ससुर भी सहृदय अपनी पुत्रियों को हिस्सा देने को तैयार हो गए. गौर करने की बात यह हैं की उन पांचो ननदों का विवाह सम्मानित और समृद्ध परिवारों में हुआ हैं और उनके पत्तियों की प्रस्थिति काफी अच्छी थी,तथा उनका विवाह भी प्रचुर दान -दहेज़ देकर किया गया था.

 तब पुत्र -वधु ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही उसने कहा की उत्तराधिकार के बंटवारे के साथ कर्तव्यों का भी बंटवारा होगा . अगर सम्पति के 6 हिस्से हुए तो माता- पिता जी, जो अब तक बेटे- बहु के साथ रहते थे अब साल के दो महीने हरेक संतान के साथ रहेंगे .इस प्रकार माता पिता साल में केवल दो महीने ही बेटा-बहु के साथ रहेंगे. 

यह सुन कर बेटियों ने विद्रोह कर दिया और कहा की अगर वो माता- पिता को रखेंगी तो उनके अपने सास-ससुर कहाँ जायँगे ? इस पूरे प्रकरण में विचारने योग्य तथ्य यह हैं की सास ने खुद अपनी ननदों को अपने ससुराल की सम्पति में से फूटी कौड़ी भी नहीं दी थी.लेकिन अपनी समृद्ध बेटियों को वो उत्तराधिकार में हिस्सा दे रहीं हैं.

यह महिलाओ की जटिल और दोहरी मानसिकता हैं. उनकी ननद या बेटी की ननद अगर अपनी पैतृक सम्पति में अपना हिस्सा मांगती हैं तो वो लालची और घर तोड़ने वाली होती हैं ,लेकिन यही काम अपनी बेटी करती हैं तो वो जरूरतमंद और वैधानिक होती हैं.

'येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:। '  (इस श्लोक या मन्त्र का अर्थ है कि जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षाबंधन से मैं तुम्हें  बांधती हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा| हे रक्षे!( रक्षासूत्र) तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो। )कहते हुए ना जाने कितनी बार हमने अपने भाईयों की कलाइयों में राखी बांध कर आजीवन अपनी रक्षा का वचन माँगा हैं. आज हमें यकीन नहीं रहा की भाभी के आने के बाद वही भाई हमारी रक्षा करनेका टाइम निकाल सकता हैं.खून पानी से गाढ़ा ही होता हैं , विपत्ति पड़ने पर प्रत्येक भाई अपनी बहन की रक्षा करेगा ही, इस पर विश्वास करना चाहिए. यदि हम बहने अपने मायके में अपने अधिकारों की मांग भी करती हैं हमें अपने ससुराल की बेटियों को भी उनका हक़ देना चाहिए और अधिकारों की मांग के साथ अपने कर्तव्यो को निभाने की कुब्बत भी होनीचाहिए. 

वैधानिक कानून सामाजिक परिवर्तन नहीं ला सकते हैं.जब हमारे हृदय परिवर्तित होंगे तभी समाज बदलेगा ,और फिर अपने भाई की एक मुस्कान के ऊपर तीनों जहान की दौलतें कुर्बान.

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वन्दना तिवारीवन्दना तिवारी

मन के झरोखे से दिखने वाले दृश्य मेरे विचारों में अभिव्यक्ति पाते हैं।