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Monday, January 11, 2016

कुंडली में पक्षाघात


जब एक या एकाधिक मांसपेशी समूह की मांसपेशियाँ कार्य करने में पूर्णतः असमर्थ हों तो इस स्थिति को पक्षाघात या लकवा मारना कहते हैं। पक्षाघात से प्रभावी क्षेत्र की संवेदन-शक्ति समाप्त हो सकती है या उस भाग को चलना-फिरना या घुमाना असम्भव हो जाता है। यदि दुर्बलता आंशिक है तो उसे आंशिक पक्षाघात कहते हैं।

पक्षाघात तब लगता है जब अचानक मस्तिष्क के किसी हिस्से मे रक्त आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और मस्तिष्क की कोशिकाओं के आस-पास की जगह में खून भर जाता है। जिस तरह किसी व्यक्ति के हृदय में जब रक्त आपूर्ति का आभाव होता तो कहा जाता है कि उसे दिल का दौरा पड़ गया है उसी तरह जब मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम हो जाता है या मस्तिष्क में अचानक रक्तस्राव होने लगता है तो कहा जाता है कि आदमी को मस्तिष्क का दौरा पड़ गया है।

शरीर की सभी पेशियों का नियंत्रण केंद्रीय तंत्रिकाकेंद्र (मस्तिष्क और मेरुरज्जु) की प्रेरक तंत्रिकाओं से, जो पेशियों तक जाकर उनमें प्रविष्ट होती हैं, होता है। अत: स्पष्ट है कि मस्तिष्क से पेशी तक के नियंत्रणकारी अक्ष के किसी भाग में, या पेशी में हो, रोग हो जाने से पक्षाघात हो सकता है। सामान्य रूप में चोट, अबुद की दाब और नियंत्रणकारी अक्ष के किसी भाग के अपकर्ष आदि, किसी भी कारण से उत्पन्न प्रदाह का परिणाम आंशिक या पूर्ण पक्षाघात होता है।


कारक

लग्न :  व्यक्तित्व और सम्पूर्ण स्वस्थ 
6 भाव ? स्वामी --- रोग भाव 
8 वां भाव/स्वामी --- क्रोनिक बीमारी,   
12 वां भाव /स्वामी --- पैरों का प्रतिनिधित्व , हॉस्पिटल, बिस्तर
शनि --- बाधक ग्रह , कष्टकारी रोग, पैरों का कारक, गति में बाधक 
चन्द्रमा --- मस्तिष्क और रक्त - संचार का कारक ग्रह 

योग : 
  1. चन्द्रमा अस्त हो और पाप प्रभाव में हो तो पक्षाघात होने की सम्भावना अधिक होती है | 
  2. 6 ठा भाव पापी ग्रहों से पीड़ित हो एवम गुरु से दृष्ट न  हो और उस भाव में पाप ग्रह  भी  स्थित हो तो पक्षाघात होने की आशंका रहती है | 
  3. शनि के साथ चन्द्रमा ईसराफ योग  बनाता हो ( शीघ्र गति ग्रह से मंद गति ग्रह  आगे हो ) तो भी पक्षाघात होने की सम्भवना रहती है | 
  4. कर्क राशि में स्थित  सूर्य पर शनि की दृष्टि हो  | 
  5. पाप ग्रहों के साथ चन्द्रमा 6 ठे भाव में हो उसे पाप ग्रह देखते हों | 
  6. क्षीण चन्द्रमा एवम शनि व्यय यानी 12 वें भाव में हों | 
  7. मीन राशि , 12  वां भाव, चन्द्रमा और शनि का 6 ठे भाव या पाप प्रभाव में होना पैरों के क्रियाकलापों में विकार उत्पन्न  करता है | 

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By
Geeta Jha