Tuesday, January 30, 2018

Cosmic Facial with the Absorption of Sun Photons



Sun is our parent star

  • Sun gives us light, heat and other radiations which we can neither feel nor see.
  • Cosmic radiation of the sun is one of the most powerful forms of energy known to exist in the universe.
  • The green plants have the ability of photosynthesis, in which they arrest the sun rays, combine it with inorganic substance and give food to living entities.
  • Just as photosynthesis occurs in plants, a bioluminescence occurs in our bodies through the conscious and forced absorption of sun light, in which we inhale and exhale the salubrious subtle rays of sun photons through the third eye [pineal gland], medulla oblongata and brain cells thereby rejuvenating ourselves.
  • With conscious breathing we can absorb the sun rays, and can arrest the sun light photon in our body.
  • Pineal gland, brain and retina have photoreceptor cells. So they are excellent receptor of sun rays and receive subtle seven colour solar energy which can cure all kind of mental and physical diseases and give us a lustrous, divine and glowing face and body.
Procedure of solar photon absorption

  • This technique is prescribed for one month for cosmic facial. But if you want to dissolve your mental, physical and psychological problems/ailments you have to continue this ritual for 3 consecutive months.
  • Choose the time of sun rise for this ritual because at this time the UV (ultra violet) radiations are the least.
  • Stand erect on bare ground with bare foot or if you are standing on a cemented floor, tiles etc place a cotton cloth beneath your bare feet.


  • Try to gaze the sun for few minutes. Do not gaze continuously at sun, if you blink it is perfectly alright.
  • While gazing take very slow breaths, inhale and exhale very slowly and deeply.
  • With each deep inhalation, visualize that you are absorbing the cosmic photon particle, radiating from the almighty sun and you are being charged with more and more cosmic photons particles.
  • While gazing the sun, try to increase the number of inhalation starting from 10 to maximum 30, over the span of one month's time.
  • After sun gazing does not take any liquid or solid food for next 45 minutes. Because the sun light absorption temporary increases the body heat, metabolism and blood circulation.
  • After one month's time your face will shine like a diamond, your all facial flaws will exit within one month. Your facial skin will glow like bioluminescence it will radiate the divine light, which no cosmetic facial can give ever.

BY
GEETA JHA 
INDIA

Sunday, January 28, 2018

आध्यत्मिक अनुभव -रहस्यमय सुगंध

अध्यात्म  के मार्ग पर चलने वाले अधिकतर साधकों को कभी कभी ऐसी सुगंध का अनुभव  होता है जो किसी भी बाहरी स्रोत से नहीं आ रही होती है । रमन एक आध्यात्मिक संस्थान से कई वर्षों से जुड़ा हुआ था । वह एक कंप्यूटर इंजीनियर था । अपनी क़ाबलियत का इस्तमाल रमन अपने आध्यात्मिक संस्थान  के विचारों और गतिविधयों को इंटरनेट के माध्यम से अनेक लोगों तक पहुंचा  कर करता  था । कुछ दिनों से रमन ने ध्यान दिया  की जब भी वह अपने संस्थान विषय के में कोई भी जानकारी  इंटरनेट पर डालता था तो  उसे चंदन की भीनी भीनी खुशबु  आती थी । पहले रमन ने सोचा था की घर में या पास पड़ोस में किसी ने  चन्दन की अगरबत्ती या धुप जलाया हुआ होगा । लेकिन खोज खबर के बाद उसे पता चला की कहीं ऐसा कुछ नहीं है और खास बात यह थी की वह खुशबु केवल उसे ही आ रही थी जबकि परिवार के ने सदस्यों को इसका कोई अनुभव नहीं हो रहा था । रमन ने इस आध्यत्मिक अनुभव को अपने गुरु की कृपा समझा  और इस संकेत को सकारत्मक रूप से लेते हुए उसने माना की वह अध्यात्म  के मार्ग पर सही दिशा में जा रहा है । 

रमन की तरह अध्यात्म मार्ग पर चलने वाले साधकों के लिए बिना किसी स्रोत के अाने वाले  रहस्यमय सुगंध का अनुभव होना आम बात है  । कभी कभी ऐसे व्यक्तियों को भी इस सुगंध का अनुभव होता है जो अध्यात्म के मार्ग पर नहीं हैं ऐसा मुख्यता दो कारणों से होता है प्रथम पूर्व जन्मों में उंसके द्वारा की गई साधनोें  के प्रतिफल से  जिसका उन्हें इस जन्म में भान नही होता है दूसरा कुछ दैवीय प्रयोजनों से जिससे वे आपने विकास के मार्ग की दिशा को प्राप्त  कर सके ।

                                    

साधना के दौरान अनुभव की गई रहस्यमयी  सुगंध गुलाब, चन्दन, भस्म ,केवड़ा ,मोगरे ,इत्र के समान होती है । ऐसे और कितने प्रकार की  सूक्ष्म सुगंध होती है जिन्हें किसी ज्ञात श्रेणियों में नहीं रखा जा सकता है ।
अधिकतर साधना करते समय , आध्यात्मिक विचार आते समय या गुरु का ध्यान करते  समय  ऐसे रहस्यमयी सुगंध का अनुभव होता है । कभी भीड़ में , बाजार  में, ऑफिस में ,घर पर या वाहन में भी ऐसी गंध का अनुभव हो सकता है ।

 पीयूष कुंडली योग का एक साधक है । अक्सर मन्त्र जप करते हुए उसे पवित्र  भस्म की सुगंध आती है  । उसे इस  सुगंध का अनुभव कुछ  क्षणों से लेकर कई मिनटों तक होता रहता है । 

अनुराधा  राधा रानी की परम भक्त है अक्सर उसे गुलाब और मोगरे की रहस्यमय सुगंध आती है और उन पलों में वह भावविभोर हो उठती है । 

रमेश एक  प्रतिष्ठित संस्थान में वैज्ञानिक है ।  उन्हें  परमात्मा  ,पूजापाठ ,आस्था, श्रद्धा के ऊपर कोई विश्वास नहीं था  । जीवन के  प्रत्येक तथ्य , घटना और जानकारी को वे  अपने तार्किक वैज्ञानिक बुद्धि से ही हल करने का प्रयास करते थे । कुछ दिनों से उन्हें  अचानक गुलाब के फूलों की सुगंध आ रही थी । उन्होंने  अपनी वैज्ञानिक बुद्धि से इस सुगंध के कारण और स्रोत को जानने  की पूरी कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता  नहीं मिली ।एक बार अपनी पत्नी के आग्रह करने पर वे  ऋषिकेश गए वहां उन्हें साधनारत एक ध्यानमग्न संत दिखाई दिए । उन्हें देखते है रमेश को पुनः एक बार फिर गुलाब के ताज़े फूलों  की  सुगंध का झोंका आया । रमेश उस संत के दीप्तिमान और शांत चेहरे के भाव भंगिमा को एकटक निहारने लगे उन्हें लगा की उस    संत से उनका  कोई पुराना  सम्बन्ध है । संत ने अपनी आँखें खोली और रमेश को स्नेह से गले लगते हुए कहा है वे बरसों से उसका इंतज़ार कर रहे थे । कालांतर में रमेश ने उन संत से दीक्षा और शक्तिपात लिया और अध्यात्म के मार्ग पर चलने लगे । उन्हें समझ आ गया था की अपनी सीमित  बुद्धि के प्रयोग से प्रकृति के असीम रहस्यों को नहीं समझा  जा सकता है ।

रहस्यमय सुगंध का अनुभव कैसे होता है   ? 
साधरणतया एक गुलाब के फूल से हम अपने स्थूल इन्द्रियों द्वारा सुगंध का अनुभव  करते हैं  । इसमें गुलाब का फूल स्थूल होता है जो  प्रत्यक्ष आँखों से दिखाई देता है  है जिसकी खुशबु का अनुभव हम अपनी  स्थूल  इन्द्रियों में से नाक  द्वारा करते  है  । लेकिन आध्यात्मिक अनुभव में   बिना किसी स्थूल गुलाब के फूल की उपस्थिति के हमें सुगंध का अनुभव  होता है । ऐसा सूक्ष्म अनुभव सूक्ष्म इन्द्रियों द्वारा अनुभूत किये जाते हैं  जिसे छठी इन्द्रिय या सिक्स्थ सेंस भी कहते हैं । पृथ्वी तत्व की तन्मात्रा( निहित विशेषता ) गंध है, जल तत्व की तन्मात्रा रस है  ,अग्नि की स्पर्श ,वायु की तेज  और आकाश की ध्वनि है ।  सुगंध पृथ्वी तत्व का अदृश्य सूक्ष्म तत्व है । अतः पृथ्वी तत्व की सूक्ष्म अनुभूति सुगंध के रूप में होती है जिसे  छठी इन्द्रिय द्वारा अनुभव किया जाता  है । वैसे ही  गुलाब  एक पृथ्वी तत्व है और उसकी सूक्ष्म अनुभूति गुलाब की सुगंध के रूप में होती है । 

नियमित साधना करने से  सिक्स्थ सेंस विकसित और परमार्जित होती  है । जैसे एक रेडियो वातावरण में उपस्थित हज़ारों फ्रीक्वेंसी में से अपने लिए निर्धारित फ्रीक्वेंसी को कैच कर लेता है ।उसकी  प्रकार से विकसित सिक्स्थ सेंस सूक्ष्म जगत में व्याप्त  अननत फ्रीक्वेंसी में से आपने निर्धारित फ्रीक्वेंसी को ग्रहण कर लेता है ।

किसे रहस्यमयी सुगंध का अनुभव होता है ?
  1. यह जरुरी नहीं की अध्यात्म के मार्ग पर चलने वाले प्रत्येक साधक को सूक्ष्म सुगंध का अनुभव होगा ही  । कई बार अत्यंत उन्नत साधक या अन्य साधकों को  इसका अनुभव  नहीं होता है । इसका कारण  है की अपने निजी आध्यत्मिक मार्ग में उन्हें इस प्रकार के अनुभवों की जरुरत नहीं होती है या पिछले जन्मों में वे इन अनुभवों से गुजर चुके हों  ।
  2. कभी कभी किसी संत,महात्मा,गुरु देवी देवता  के स्मरण मात्र से सुगंध आने लग जाती है या कभी कभी मन्त्र जाप या ध्यान करते समय सूक्ष्म सुगंध आती है । 
  3. यह जरूरी नही है की सभी प्रकार की विविध सुगंध एक ही  साधक के अनुभव में आये या सूक्ष्म  सुगंध का अनुभव उन्हें हमेशा बने रहे ।
  4. स्त्रियों को पुरुषों की अपेक्षा सूक्ष्म सुगंध का अधिक अनुभव होता है क्योंकि स्त्रियों की सिक्स्थ सेंस पुरुषों से अधिक विकसित होती है ।
  5. रहस्यमयी सुगंध अध्यात्म में एक सकरात्मक अनुभव माना जाता है, जिसे एक कृपा के रूप में मानना चाहिए । यह अनुभव बताता  है की आप सही दिशा में जा रहे  हैं । रहस्यमयी सुगंध की तरह एक रहस्यमयी दुर्गन्ध भी होती है जो एक नकारात्मक  अनुभव होता है जो जगत में विद्यमान  अदृश्य नकारात्मक  शक्तियों द्वारा  पैदा की जाती है । 
द्वारा 
गीता झा 

Thursday, January 25, 2018

कलौंजी - A cure for all diseases except death

कलौंजी रनुनकुलेसी कुल का झाड़ीय पौधा है,जिसके बीज औषधि ,सौन्दर्य प्रसाधन, खुशबू एवं मसाले के रूप में प्रयुक्त होते हैं।जिसका वानस्पतिक नाम “निजेला सेटाइवा है जो लैटिन शब्द नीजर (यानी काला) से बना है ।

 कलौंजी का पौधा सौंफ के पौधे से थोड़ा छोटा होता है। इसके फूल हल्के नीले व पीले रंग के होते हैं और इसके आकार तारे के समान होते हैं। अनियन सीड कहने  के कारण अधिकतर लोग इसे प्याज का बीज ही समझते हैं क्योंकि इसके बीज प्याज के बीज जैसे  ही दिखते हैं। लेकिन प्याज और कलौंजी  बिल्कुल अलग अलग पौधे हैं।

विश्व में ब्लैक सीड्स ,रोमन कोरिएंडर, ब्लैक सीसेम, ब्लैक क्यूमिन, ब्लैक कैरावे तथा अनियन सीड के नाम  से जाने  वाले कलौंजी को हिन्दी ,गुजरती  और मराठी में  कलौंजी या मंगरैला , संस्कृत में  कलवंचिका, कालाजाजी या कृष्णजीरा ,बंगाली में मुगरेला,तेलुगु में नल्ला जीरा और तमिल में करून जीरागम कहते हैं ।
कलौंजी का स्वाद हल्का कड़वा व तीखा और गंध तेज होती है। भारत में कलौंजी का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों नान, ब्रेड, केक और आचारों में किया जाता है।




कलौंजी का रसायनिक विश्लेषण

Nutritional Composition
Black Cumin Seed
Saturated & Unsaturated Fatty Acids
Black Seed Oil
protein
21%
Saturated Acid
18.1%
carbohydrates
35%
Monounsaturated Acids
23.8%
fats
35-38%
Polyunsaturated Acids
58.1%

Nutritional Value
Black Seed Oil
Fatty Acids
Black Seed Oil.
Protein
208 ug/g
Myristic Acid (C14:0)
0.5%
Thiamin
15ug/g
Palmitic Acid (C16:0)
13.7%
Riboflavin
1 ug/g
Palmitoleic Acid (C16:1)
0.1%
Pyridoxine
5ug/g
Stearic Acid (C18:0)
2.6%
Niacin
57 ug/g
Oleic Acid (C18:1)
23.7%
Folacin
610 IU/g
Linoleic Acid (C18:2)(Omega-6)
57.9%
Calcium
1.859 mg/g
Linolenic Acid (18:3n-3) (Omega-3)
0.2%
Iron
105 ug/g
Arachidic Acid (C20:0)
1.3%
Copper
18 ug/g


Zinc
60 ug/g


Phosphorus
5.265 mg/g



Essential Oil Composition (1.4%)
Black Seed Oil
Carvone
21.1%
Alfa-Pinene
7.4%
Sabinene
5.5%
Beta-Pinene
7.7%
P-cymene
46.8%
Others
11.5%


कलौंजी में  100 से अधिक महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं। कलौंजी  में एक लाल व भूरे रंग का स्थिर तेल 31 प्रतिशत होता है। इसमें पीला भूरा उड़नशील तेल 0.5 से 1.6 प्रतिशत होता है जिनमें मुख्य निजेलोन, थाइमोक्विनोन, साइमीन, कार्बोनी, लिमोनीन आदि प्रमुख हैं। उड़नशील तेल में कार्बन 45 से 60 प्रतिशत की मात्रा में होता है। निजेलोन में एन्टी-हिस्टेमीन गुण होता हैं, यह श्वास नली की मांस पेशियों को ढीला करती है, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करती है और खांसी, दमा, ब्रोंकाइटिस आदि को ठीक करती है।थाइमोक्विनोन बढ़िया एंटी-आक्सीडेंट है, कैंसर रोधी, कीटाणु रोधी, फंगस रोधी है, यकृत का रक्षक है और असंतुलित प्रतिरक्षा प्रणाली को दुरूस्त करता है। 

तकनीकी भाषा में कहें तो इसका असर इम्यूनोमोड्यूलेट्री है। कलौंजी में केरोटीन, विटामिन ए, बी-1, बी-2, नायसिन व सी और केल्शियम, पोटेशियम, लोहा, मेग्नीशियम, सेलेनियम व जिंक आदि खनिज होते हैं। कलौंजी में 15 अमीनो अम्ल होते हैं जिनमें 8 आवश्यक अमाइनो एसिड हैं। ये प्रोटीन के घटक होते हैँ और प्रोटीन का निर्माण करते हैं। ये कोशिकाओं का निर्माण व मरम्मत करते हैं। शरीर में कुल 20 अमाइनो एसिड होते हैं जिनमें से आवश्यक 9 शरीर में नहीं बन सकते अतः हमें इनको भोजन द्वारा ही ग्रहण करना होता है। अमीनो  एसिड्स मांस पेशियों, मस्तिष्क और केंन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के लिए ऊर्जा का स्रोत हैं, एंटीबॉडीज का निर्माण कर रक्षा प्रणाली को पुख्ता करते है और कार्बनिक अम्लों व शर्करा के मेटाबोलिज्म  में सहायक होते हैं।

कलौंजी के औषधीय  गुण
  Analgesic ---दर्दनाशक
 Anti-Bacterial---प्रति जीवाण्विक
   Anti-Inflammatory ---सूजन-जलन कम करने के लिए
   Anti-Ulcer ---अल्सर खत्म करने के लिए
  Anti-Cholinergic---कोलीन धर्म रोधी जो acetylcholineके कार्य को बाधित करता है
  Anti-Fungal---कवक रोधी
  Anti --Hypertensive----अतिसंवेदनशीलता  कम करने के लिए
  Antioxidant ----ऑक्सीकरण रोधी रोगों से लड़ने के लिए
 Antispasmodic----मांसपेशियों की जकड़न दूर करने के लिए
  Antiviral ----विषाणुरोधी
 Bronchodilator ---श्वासनलिकासारकयंत्र जो श्वास नली को फैलता है
  Gluconeogenesis Inhibitor ----डायबिटीज को रोकता है
 Hepatoprotective  -----लिवर की सुरक्षा करता है
Hypotensive ----अत्यधिक निम्न  रक्त चाप को सामान्य बनता है
 Insulin Sensitizing----इन्सुलिन को सुग्राही बनाना
 Interferon Inducer-----बाहरी हमलों या इन्फेक्शन  से लड़ने के लिए इंटरफेरॉन को प्रेरित करना
 Leukotriene Antagonist----अस्थमा को दूर करना
Renoprotective -----किडनी की सुरक्षा के लिए
Tumor Necrosis Factor Alpha Inhibitor -----ट्यूमर  कोशिकाओं को  खत्म  करने के लिए

कलौंजी का कितना और कैसे प्रयोग करें
1.  कलौंजी 1 से 3 ग्राम की मात्रा में उपयोग किया जाता है। कलौंजी के तेल का प्रयोग 2.5-5 ग्राम करें तक़रीबन आधा टी  स्पून  |
2.      कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है।
3.      एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें।
4.      पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पीएं।
5.      दूध में कलौंजी उबालें। ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पीएं।
6.      कलौंजी को ग्राइंड करें तथा पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें।
7.  कलौंजी को ब्रैड, पनीर तथा पेस्ट्रियों पर छिड़क कर इसका सेवन करें।
8. जीरा ,कलौंजी ,मेथी ,सरसों और सौंफ से बनने वाले  पंच -फ़ौरन  में भी  इसका प्रयोग किया जा सकता है  । 
9. एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच  [2. 5 ग्राम ] कलौंजी का तेल एक चम्मच   शहद   सुबह खाली पेट लेने  से सभी रोगों में  फायदा करता है ।
10.आधा चम्मच अज़वाइन  में चुटकी भर कलौंजी डाल  कर सुबह शाम खाली पेट चबा चबा कर खाने  से और इसके आधे घंटे बाद एक गिलास पानी पीने से   समस्त रोगों में लाभ मिलता है  ।

   

कलौंजी के विभिन्न प्रयोग

क्रम संख्या
रोग का नाम
उपचार
1
कैंसर और अन्य ट्यूमर

  1.  कैंसर के उपचार में कलौंजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक गिलास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें। लहसुन भी खुब खाएं। इस रोग में रोगी को औषधि देने के साथ ही एक किलो जौ के आटे में 2 किलो गेहूं का आटा मिलाकर इसकी रोटी, दलिया बनाकर रोगी को देना चाहिए। आलू, अरबी और बैंगन से परहेज़ करें।
  2.  कलौंजी के तेल को गांठो पर लगाने और एक चम्मच कलौंजी का तेल गर्म दूध में डालकर पीने से गांठ नष्ट होती है।
2
खाँसी  दमा   छींके

  1.  छाती और पीठ पर कलौंजी के तेल की मालिश करें, तीन बड़ी चम्मच तेल रोज पीयें और पानी में तेल डाल कर उसकी भाप लें।
  2.  यदि बार-बार छींके आती हो तो कलौंजी के बीजों को पीसकर सूंघें।
  3.  जैतून के तेल में कलौंजी का बारीक चूर्ण मिलाकर कपड़े में छानकर बूंद-बूंद करके नाक में डालने से बार-बार जुकाम में छींक आनी बंद हो जाती हैं और जुकाम ठीक होता है।
  4.  कलौंजी को सूंघने से जुकाम में आराम मिलता है।
  5. 20 ग्राम कलौंजी को अच्छी तरह से पकाकर किसी कपड़े में बांधकर नाक से सूंघने से बंद नाक खुल जाती है और जुकाम ठीक होता है।
3
अवसाद और सुस्ती

  1.  एक गिलास संतरे के रस में एक बड़ी चम्मच तेल डाल कर 10 दिन तक सेवन करें। आप को बहुत फर्क महसूस होगा।
  2.  पिसी हुई कलौंजी आधा चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से मलेरिया का बुखार ठीक होता है।
  3.  रात में सोने से पहले आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है।
4
स्मरणशक्ति और मानसिक चेतना

  1.  एक छोटी चम्मच तेल 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ सेवन करें।
  2. लगभग 2 ग्राम की मात्रा में कलौंजी को पीसकर 2 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
5
मधुमेह

  1. एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके और आधा कप पितपाप्र को पीस कर चूर्ण बना लें। आधी छोटी चम्मच कलौंजी के तेल के साथ रोज नाश्ते के पहले एक महीने तक लें।
  2. प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है।
  3. एक कप काली चाय में आधा चाय का चम्मच
  4.  कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह नाश्ते से पहले पी लेना चाहिए। फिर रात को भोजन के पश्चात सोने से पहले एक कप काली चाय में आधा  चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पी लेना चाहिए। चिकनाई वाले पदार्थों के उपयोग से बचें। 
6
गुर्दे की पथरी और मूत्राशय की पथरी

  1.  पाव भर कलौंजी को महीन पीस कर पाव भर शहद में अच्छी तरह मिला कर रख दें। इस मिश्रण की दो बड़ी चम्मच को एक कप गर्म पानी में एक छोटी चम्मच तेल के साथ अच्छी तरह मिला कर रोज नाश्ते के पहले पियें।
  2. 250 ग्राम कलौंजी पीसकर 125 ग्राम शहद में मिला लें और फिर इसमें आधा कप पानी और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन 2 बार खाली पेट सेवन करें। इस तरह 21 दिन तक पीने से पथरी गलकर निकल जाती है।
7
उल्टी और उबकाई

  1. एक छोटी चम्मच कार्नेशन और एक बड़ी चम्मच तेल को उबले पुदीने के साथ दिन में तीन बार लें।
  2. आधा चम्मच कलौंजी का तेल और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से उल्टी बंद होती है।
  3. उल्टीयाँ कम करने के लिए, 1/2 टी-स्पून ताज़े अदरक के रस में बराबर मात्रा में कलौंजी डालकर, दिन में 2 बार पीने से आराम मिलता है।
8
हृदय रोग, रक्त चाप और हृदय की धमनियों का अवरोध

  1. जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक छोटी चम्मच तेल मिला कर लें, रोज सुबह लहसुन की दो कलियां नाश्ते के पहले लें और तीन दिन में एक बार पूरे शरीर पर तेल की मालिश करके आधा घंटा धूप का सेवन करें। यह उपचार एक महीने तक लें।
  2. रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है।
  3. तथा 30 मिलीलीटर जैतुन का तेल और एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पूर शरीर पर मालिश आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में लाभ मिलता है। यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक करना चाहिए।
9
सफेद दाग , कुष्ठ रोग और त्वचा के अन्य रोग

  1. 15 दिन तक रोज पहले सेब का सिरका मलें, फिर कलौंजी का तेल मलें।
  2. कलौंजी के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा के विकार नष्ट होते हैं।
  3. सिरके में कलौंजी को पीसकर रात को सोते समय पूरे चेहरे पर लगाएं और सुबह पानी से चेहरे को साफ करने से मुंहासे कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते हैं।
  4. 50 ग्राम कलौंजी के बीजों को पीस लें और इसमें 10 ग्राम बिल्व के पत्तों का रस 10 ग्राम हल्दी मिलाकर लेप बना लें। यह लेप खाज-खुजली में प्रतिदिन लगाने से रोग ठीक होता है।
  5. चेहरे को सुन्दर आकर्षक बनाने के लिए कलौंजी के तेल में थोड़ा सा जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर बाद चेहरा धो लें। इससे चेहरे के दाग़-धब्बे दूर होते हैं।
  6. कलौंजी को पीस कर सिरके में मिलकर पेस्ट बनाए और मस्सों पर लगा लीजिये.मस्से कट जायेंगे.
  7. मुंहासे दूर करने के लिए कलौंजी और सिरके का पेस्ट रात में मुंह पर लगा कर सो जाएँ |
  8. मुंहासों  की समस्या को दूर करने के लिए नींबू के रस और कलौंजी के तेल को मिक्स करें। सुबह-शाम मुंहासों  पर इसे लगाएं। यह कील-मुहांसे दूर करने के साथ ही चेहरे के दाग-धब्बे मिटाता है। इसके इस्तेमाल से चेहरा ग्लो करने लगता है।
10
कमर दर्द और गठिया

  1.  हल्का गर्म करके जहां दर्द हो वहां मालिश करें और एक बड़ी चम्मच तेल दिन में तीन बार लें। 15 दिन में बहुत आराम मिलेगा।
  2. एक चम्मच सिरका, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है।
11
सिर दर्द

  1. माथे और सिर के दोनों तरफ कनपटी के आस-पास कलौंजी का तेल लगायें और नाश्ते के पहले एक चम्मच तेल तीन बार लें कुछ सप्ताह बाद सर दर्द पूर्णतः खत्म हो जायेगा।
  2. कलौंजी के तेल को ललाट से कानों तक अच्छी तरह मलनें और आधा चम्मच कलौंजी के तेल को 1 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से सिर दर्द ठीक होता है।
  3. कलौंजी खाने के साथ सिर पर कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर मालिश करें। इससे सिर दर्द में आराम मिलता है और सिर से सम्बंधित अन्य रोग  भी दूर होते हैं।
  4.  कलौंजी के बीजों को गर्म करके पीस लें और कपड़े में बांधकर सूंघें। इससे सिर का दर्द दूर होता है। कलौंजी और काला जीरा बराबर मात्रा में लेकर पानी में पीस लें और माथे पर लेप करें। इससे सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर होता है।
12
अम्लता ,आमाशय शोथ और पेट के  रोग

  1.  एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल एक प्याला दूध में मिलाकर रोज पांच दिन तक सेवन करने से आमाशय की सब तकलीफें दूर हो जाती है।
  2. 10 ग्राम कलौंजी को पीसकर 3 चम्मच शहद के साथ रात सोते समय कुछ दिन तक नियमित रूप से सेवन करने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं।
  3. किसी भी कारण से पेट दर्द हो एक गिलास नींबू पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीएं।
  4. चुटकी भर नमक और आधे चम्मच कलौंजी के तेल को आधा गिलास हल्का गर्म पानी मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है।
  5. कलौंजी, जीरा और अजवाइन को बराबर मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद लेने से पेट का गैस नष्ट होता है।
  6. पेट के कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए  1 टी-स्पून एप्पल साइडर विनेगर  को 1/2 टी-स्पून कलौंजी के साथ मिलाकर, दिन में 2 बार, खाने से पहले 10 दिनों तक लें, और इस दौरान मीठे का सेवन ना करें।
  7. अपच या पेट दर्द में आप कलौंजी का काढा बनाइये फिर उसमे काला नमक मिलाकर सुबह शाम पीजिये
13
बाल झड़ना

  1. बालों में नीबू का रस अच्छी तरह लगाये, 15 मिनट बाद बालों को शैंपू कर लें अच्छी तरह धोकर सुखा लें, सूखे बालों में कलौंजी का तेल लगायें एक सप्ताह के उपचार के बाद बालों का झड़ना बन्द हो जायेगा।
  2. 50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें और इस पानी से बालों को धोएं। इससे बाल लम्बे घने होते हैं।
  3. जली हुई कलौंजी को हेयर ऑइल में मिलाकर नियमित रूप से सिर पर मालिश करने से गंजापन दूर होकर बाल उग आते हैं।
  4. बाल बहुत गिर रहे है तो कलौंजी पीस कर पतला लेप बनाकर पूरे सर में लगा लीजिये,बाल गिरने बंद और लम्बे होने शुरु हो जायेंगें |
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आँख -कान -दांत  के रोग

  1. आंखों की लाली, मोतियाबिन्द, आंखों से पानी का आना, आंखों की रोशनी कम होना आदि। इस तरह के आंखों के रोगों में एक कप गाजर का रस, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2बार सेवन करें। इससे आंखों के सभी रोग ठीक होते हैं।
  2. आंखों के चारों और तथा पलकों पर कलौंजी का तेल रात को सोते समय लगाएं और एक बड़ी चम्मच तेल को एक प्याला गाजर के रस के साथ एक महीने तक लें।। इससे आंखों के रोग समाप्त होते हैं।
  3.  यदि आंखों में मोतियाबिंद हो या आंखे कमजोर हो गई हों तो कलौंजी के तेल की दो चम्मच गाजर के जूस में मिलाकर सुबह शाम दो बार सेवन करें।
  4.  कलौंजी का तेल और लौंग का तेल 1-1 बूंद मिलाकर दांत मसूढ़ों पर लगाने से दर्द ठीक होता है। आग में सेंधानमक जलाकर बारीक पीस लें और इसमें 2-4 बूंदे कलौंजी का तेल डालकर दांत साफ करें। इससे साफ स्वस्थ रहते हैं।
  5.  दांतों में कीड़े लगना खोखलापन: रात को सोते समय कलौंजी के तेल में रुई को भिगोकर खोखले दांतों में रखने से कीड़े नष्ट होते हैं।
  6. कलौंजी का तेल कान में डालने से कान की सूजन दूर होती है। इससे बहरापन में भी लाभ होता है।
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दस्त या पेचिश

  1. एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक चम्मच दही के साथ दिन में तीन बार लें दस्त ठीक हो जायेगा।
  2. 250 मिलीलीटर दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से यूरिन  की जलन दूर होती है।
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रूसी

  1. 10 ग्राम कलौंजी का तेल, 30 ग्राम जैतून का तेल और 30 ग्राम पिसी मेहंदी को मिला कर गर्म करें। ठंडा होने पर बालों में लगाएं और एक घंटे बाद बालों को धो कर शैंपू कर लें।
  2. नियमित सिर  पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से रुसी से निज़ात  मिलती है
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स्नायुविक मानसिक रोग 

  1. एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर रात को सोते समय पीने से स्नायुविक मानसिक तनाव दूर होता है।
  2. कलौंजी का तेल एक चौथाई चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ कुछ महीने तक प्रतिदिन पीने और रोगग्रस्त अंगों पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से लकवा रोग ठीक होता है।
  3. दही में कलौंजी को पीसकर बने लेप को पीड़ित अंग पर लगाने से स्नायु की पीड़ा समाप्त होती है।
  4. कलौंजी का तेल एक चौथाई चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ कुछ महीने तक प्रतिदिन पीने और रोगग्रस्त अंगों पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से लकवा रोग ठीक होता है।
  5. आधे कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद आधे चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लें। इससे पोलियों का रोग ठीक होता है।
  6. एक कप गर्म पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से मिर्गी के दौरें ठीक होते हैं। मिर्गी के रोगी को ठंडी चीजे जैसे- अमरूद, केला, सीताफल आदि नहीं देना चाहिए।
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स्त्री रोग

  1. स्त्रियों के रोगों जैसे श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर, प्रसवोपरांत दुर्बलता रक्त स्त्राव आदि के लिए कलौंजी गुणकारी है। थोड़े से पुदीने की पत्तियों को दो गिलास पानी में डाल कर उबालें, आधा चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर दिन में दो बार पियें।
  2. यदि मासिकस्राव बंद हो गया हो और पेट में दर्द रहता हो तो एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीना चाहिए। इससे बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।
  3. एक कप पानी में 50 ग्राम हरा पुदीना उबाल लें और इस पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय सेवन करें। इससे 21 दिनों में खून की कमी दूर होती है। रोगी को खाने में खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  4. स्त्रियों के चेहरे हाथ-पैरों की सूजन: कलौंजी पीसकर लेप करने से हाथ पैरों की सूजन दूर होती है।
  5. कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 2-3 बार सेवन करने से मासिकस्राव शुरू होता है। गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं कराना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है।
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पुरूष रोग
पुरूष रोग , पुरुषहीनता आदि रोगों में एक प्याला सेब के रस में आधी छोटी चम्मच तेल मिला कर दिन में दो बार 21 दिन तक पियें।

कलौंजी को घर में संग्रह करने के तरीके

1.  कलौंजी को हवा बद डब्बे में रखकर नमी से दूर रखना चाहिए।
2.  बेहतर है कि आप इसे कम से कम मात्रा में खरीदें जिससे इसका स्वाद और खुशबु बना रहे।

कलौंजी के साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

1  कलौंजी के सेवन की कम मात्रा नुकसानदायक नहीं है । लेकिन किसी किसी को कलौंजी या उसके तेल का अधिक मात्रा में सेवन एलर्जी उत्पन्न कर सकता है । कभी कभी कलौंजी के तेल के प्रयोग से स्किन पर चतके पड़ सकते हैं ।
2.  कलौंजी ब्लड शुगर को कम करता है इसकी अधिक मात्रा ब्लड शुगर को तेज़ी से कम कर सकती है । गर्भवती या दूध पिलाने वाली महिलाओं को कलौंजी का अधिक मात्रा में प्रयोग नही करना चाहिए ।
3.  अधिक मात्रा में कलौंजी सेवन करने से दर्द, भ्रम, उत्तेजना आदि पैदा हो सकता है। त्वचा, किडनी, आंत, आमाशय और गर्भाशय पर कलौंजी का उत्तेजक प्रभाव पड़ता है।
4.  दिन भर में कलौंजी की अल्प मात्रा [आधा चम्मच] ही सेवन में प्रयोग करें नहीं तो इसकी अधिकता शरीर में पित्त के स्तर को काफी बढ़ा सकती है ।

5.कलौंजी को कभी किसी फार्मास्यूटिकल दवाई के साथ मिला कर नही खाएं ।
6...25 ग्राम या इससे अधिक  कलौंजी का सेवन शरीर में टोक्सिन /विषाक्त इफ़ेक्ट करता है  । 

अतः कलौंजी और उसके तेल का कम मात्रा में प्रयोग ही लाभदायक है ।


अनंत गुणों के भण्डार कलौंजी के विषय में यह सही कहा जाता है की यह मौत को छोड़ कर हर मर्ज़ की दवा है ।







द्वारा
गीता झा