Showing posts with label Huna –Mystic Power of the Ancients. Show all posts
Showing posts with label Huna –Mystic Power of the Ancients. Show all posts

Tuesday, January 16, 2018

विचार - इच्छा -संकल्प का विज्ञान




अहं ब्रह्मास्मि  | वेदांत के अनुसार जीव और  ईश्वर में भेद नहीं है । परन्तु जब  हम जीव में परमात्मा के गुणों का आभाव देखते हैं हमें इस शास्त्र वचन पर सहज अविश्वास हो उठता है । लेकिन हमें यह समझना चाहिए की वर्तमान  स्थिति  में मनुष्य एक बीज है और परमात्मा एक वृक्ष । मोटे बाहरी तौर पर  वृक्ष और बीज की बराबरी की तुलना नहीं की जा सकती है  , लेकिन तत्वतः दोनों एक ही हैं । अपनी सुप्त क्षमताओं का ठीक प्रकार से   प्रयोग न कर  पाने के कारण मनुष्य मलीन , दीन हीन अवस्था में पड़ा रहता है और अपना पूरा विकास नहीं कर पाता है । लेकिन उसे पूरी  स्वतंत्रता मिली हुई है की वह अपनी क्षमताओं को  जाने, उनका विकास करे और चाहे जिस दिशा में उन्हें बढ़ाये ।

बरगद का एक  बीज अपने अंदर  विशाल वृक्ष को छुपाये रहता है । जब भी उसे अवसर मिलता है  वह अपनी छुपी संपत्ति को प्रगट  कर देता है । बरगद के  बीज में एक विशाल वृक्ष उत्पन्न की करने की सुप्त शक्ति है  , लेकिन कई बार बीज नष्ट हो जाते हैं ,उनका अंकुर निकलते ही झुलस जाता है या कुछ बढ़ाने पर  पौधा मुरझा जाता है, यह बीज  की अयोग्यता  नही बल्कि उत्पादन क्रिया की त्रुटि है । इसी प्रकार  असंख्य जीव अपनी संभावनाओं से अनजान दुखी और नारकीय जीवन बिताते रहते हैं ।


 जीव चैतन्य है और उसका पोषण अनंत चेतना करती है, इसलिए उसके अंदर वह सुप्त शक्ति है वह अपनी सम्भावना को सर्व शक्तिमान के सत्तर तक उठा सके ।

जो जैसा बनना चाहता है वैसा बन जाता है । इसका रहस्य मन में उठने वाली इच्छा से आरम्भ होता है । मन का धर्म  इच्छाएं उत्पन्न करना है । मन में कोई इच्छा उठी , शीघ्र ही  मन की सेविका कल्पना शक्ति उस इच्छा का एक  मानसिक चित्र रच देती  है  , एक कल्पना  चित्र मानस पटल पर बन जाता है । यदि मन की इच्छा  निर्बल हुई तो वह कल्पना चित्र कुछ क्षणों  बाद ही अवचेतन मन की परतों में विलीन हो जाएगा, लेकिन यदि वह  इच्छा बलवती हुई तो मन की विद्युत धारा  चारो और उड़ उड़ कर अनुकूल वातावरण की तैयारी में लग जायेगी । बलवती इच्छा शक्ति अब बुद्धि को सक्रिय करेगी । अब बुद्धि में उस कल्पना चित्र के प्रप्ति के लिए तरकीबें उठेंगीं , संकटों का मुकाबला करने लायक योग्य शक्ति पैदा होगी  और ऐसी ऐसी गुप्त सुविधाएं  उपस्थित होगी जिनसे अब तक हम अनजान थे ।


जैसे एक इंसान ने सड़क पर एक BMW कार को देखा । अगर उसका देखना ऐसे ही था जैसे एक कैमरे के लेन्स से देखना तो उस कार के बारे में उसकी इच्छा शक्ति बलवती नहीं हो पाएगी, और कुछ ही समय के अंतराल पर उसे उस कार की विस्मृति हो जायेगी । लेकिन यदि उस BMW कार को देख कर उसके मन में यह इच्छा उठी की उसके पास भी ऐसी कार   हो , उसके मन में उस कार  का एक कल्पना बिम्ब बन जाएगा , यदि उसकी इच्छा और तीव्र हुई की उसके पास वह कार  होनी ही चाहिए ,  तो इच्छा शक्ति की खाद  खुराक से वह चित्र कुछ  ही समय में परिपुष्ट हो जाएगा और वास्तविक कार से अपना  घनिष्टता स्थापित कर  लेगा ,बुद्धि में तरकीबें उठेंगीं की कैसे  उस कार को प्राप्त किया जाए, यदि उस आकर्षण चित्र को निरंतर पोषण मिलता रहा तो , बाहर की   परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल हो , धीरे धीरे वह आकर्षण चित्र अपना  काम करता रहेगा और परिस्थितियों को अनुकूल करने की दिशा में कार्य आरम्भ कर देगा । इच्छा उठने  से लेकर वह कार मिलाने तक की मार्ग की असंख्य छोटी मोटी बाधाएं को साफ़ करने में वह आकर्षण कितने काम करता है, कितने संघर्ष करता है यह हम नहीं जान पाते । यही इच्छा शक्ति असंख्य प्रकार की शारीरिक, मानसिक और बाहरी  परिस्थितियों की कितने बलपूर्वक चीर  चीर  कर अपना  रास्ता साफ़ करती है ,इसे हम देखा पाते तो समझ पाते की हमारे अंदर  अत्यंत प्रभावशाली चुम्बक शक्ति भरी पड़ी है ।


यह नियम है की तत्व जितने जितने सूक्ष्म होते जायंगे उसमें निहित शक्ति उतनी ही बढ़ती जायेगी । विचार से सूक्ष्म इच्छा है और इच्छा से अधिक सूक्ष्म और शक्ति शाली संकल्प है । विचार शक्ति को इच्छा शक्ति और कालांतर में संकल्प शक्ति में परिवर्तित करके जीव जो जो बनना चाहता है बन सकता है जो जो प्राप्त करना चाहता है प्राप्त कर सकता है ।


विचार से इच्छा और इच्छा से संकल्प उत्पन्न करने का विज्ञान ही हुना मिस्टिक है । हुना Philippines आइलैंड का वह गुप्त विज्ञान है जो गुप्त है लेकिन लुप्त नहीं है । सर्वसाधारण की समझ में वाला और मनुष्य जीवन का वास्तविक लाभ उठाने की सम्भावना देने वाला यह विज्ञान ,  प्रयोगकर्ता  को चमत्कारी परिणाम देता है ।


द्वारा 

Tuesday, December 12, 2017

7 principles of life in the Hawaiian Huna tradition

Huna a Hawaiian miracle working technique
.
The word HUNA means secret in Hawaiian. Huna is a very simple technique for self- attunement to our own’s higher self. It is a valuable tool not only for people of spiritual path but for the rest of common people who just want to make their life better.The huna is a simplified forms of magic-working based upon the human-psychology.There are 7 principles of life in the Hawaiian Huna tradition.


1. IKE –--- The world is what you think it is
2. KALA –--- There are no limits, everything is possible
3. MAKIA –-- Energy flows where attention goes
4. MANAWA –-- Now is the moment of power
5. ALOHA –-- To love is to be happy with
6. MANA –-- All power comes from within
7. PONO –-- Effectiveness is the measure of truth

Saturday, January 23, 2016

हुना मैडिटेशन से रिया को कैसे लाभ हुआ



रिया वर्मा दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स की  एक होनहार  छात्रा थी, उसी इंस्टिट्यूट में सौरभ मिश्रा उसके साथ पढ़ा करता था । रिया और सौरभ में  काफी अच्छी दोस्ती थी और दोनों एक दूसरे से प्यार भी करने लगे थे ,लेकिन रिया के परिवार वाले उनके इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे और पढ़ाई पूरी करते ही परिवार वालों ने जबरदस्ती रिया की शादी अपनी बिरादरी के धनबाद के एक प्रतिष्ठित परिवार में कर दी ।

विवेक सहाय ,रिया का पति कोल्  इंडिया में इंजीनियर था । संयुक्त परिवार में रहते हुए एक प्राइवेट फर्म में काम करते हुए रिया का जीवन अच्छा गुजर रहा था । रिया के जीवन में ग्रहण तब लगा जब रिया को मालूम चला की उसने जिस संतान को जन्म दिया है वह मेंटली रेटार्डेड के होने के साथ साथ एक स्पास्टिक चाइल्ड भी  है ।उसने काफी डॉक्टर्स को दिखाया और उसे मायूसी हुई की उसका बच्चा कभी एक सामान्य जीवन नहीं जी पायेगा । अब उसके ससुराल वालों और यहां तक की उसके पढ़े लिखे पति ने रिया को ही ऐसी संतान को जन्म देने के लिए कोसना शुरू किया ....

  लेकिन रिया तो माँ थी उसके लिए तो उसका  बच्चा कलेजे का टुकड़ा था , उसकी देख भाल करने के लिए  रिया ने खुद अपनी नौकरी से भी इस्तीफा  दे दिया था ।  रिया के ससुराल वाले ऐसे बच्चे को उसके  पूर्व जन्म का श्राप मानते और रिया की कोख को ऐसे  बच्चे को जन्म देने के लिए ताने कसते रहते थे  । रिया फिर भी अपने बच्चे की ख़ातिर सब कुछ सहती और अपने बच्चे की देखभाल करती । रिया को तब बहुत दुःख होता जब उसका पति उसे एक दूसरे  सामान्य  बच्चे को  जन्म देने के  लिए दबाब डालता । उसके पति ने कहा की वह इस बच्चे को उसके नाना नानी के पास छोड़ आये , जब तक वह जियेगा रिया के माँ -बाप उसका पालन पोषण कर लेंगें  । लेकिन रिया जानती थी की अभी  अगर वह दूसरे बच्चे को जन्म देगी तो  वह इस बच्चे पर उचित ध्यान नहीं दे पाएगी ।   रिया को अंदर ही अंदर  काफी दुख होता की उसका पढ़ा लिखा पति   बच्चे का इलाज़ करवाने की जगह उससे पीछा छुड़ाने  के चक्कर में है ,जैसे  वह खाली रिया का ही बच्चा हो और उसके पति का उससे  कुछ भी लेना देना ना  हो ।

किसी तरह से रिया के 2  साल गुज़र गए । अब रिया के ससुराल वाले रिया के पति की दूसरी  शादी  की धमकी देने लगे थे  । रिया  एक स्वाभमानी लड़की थी, और अपने जिगर के टुकड़े को वह बहुत प्यार भी करती थी, वह जानती थी की उसका मासूम बेटा बेक़सूर है , जब जब वह उस बच्चे के बारे में  उलटी सीधी सुनती उसका दिल दहल जाता था । उसका पति भी  उससे बेरुखी से पेश आता था । 

मां का प्यार बेशर्त होता है रोज़ रोज़ के तानों और अपने बच्चे के प्रति सबकी उपेक्षा ने रिया को तोड़ दिया था और उसने आपसी रज़ामंदी के तलाक पेपर पर  साइन कर दिए और एक नए शहर में आपने बच्चे साथ रहने लगी । रिया अपने माँ -बाप के ऊपर बोझ नहीं बनना चाहती थी  । रिया ने एक बड़ी फर्म में नौकरी पकड़ ली और आपने बच्चे के लिए वह  बड़े बड़े डॉक्टर्स से मेडिकल सलाह लेने लगी थी । 

रिया के ऑफिस  में पायल काम करती थी । पायल का रुझान occult - science की तरफ़  था और वह huna - mystic की एक समर्पित साधक थी । पायल ने रिया को हुना तकनीक के विज्ञान के बारे में समझाया  और उसे भी हुना ध्यान करने के लिए प्रेरित किया । रिया ने ईमानदारी से अपने बच्चे और खुद के अच्छे जीवन की कामना  करते हुए हुना ध्यान करना आरम्भ कर दिया । कुछ महीनों के बाद रिया ने ध्यान दिया की उसका बच्चा अब काफी चीज़ों को समझने लगा था और उसका वर्ताब भी समझदारी वाला हो रहा था और अपने हाथों और पैरों की गति पर भी उसका नियंत्रण कुछ कुछ होने लगा था |

रिया अपने कलेजे के टुकड़े को मुस्करता हुआ देख कर फूली नहीं समाती थी   | अचानक एक दिन उसके पास सौरभ मिश्रा का फ़ोन आया । सौरभ ने उसे बताया की वह  ऑस्ट्रेलिया  में एक प्रसिद्द यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है  | रिया को वह भूल नहीं सका था इसलिए अभी तक उसने शादी भी नहीं की थी । सौरभ ने उसे बताया की कुछ दिनों से उसे अंदर से प्रेरणा मिल रही थी की रिया को उसके मदद की जरुरत है उससे कांटेक्ट किया जाए । अपने  एक पुराने कॉमन फ्रेंड से उसे रिया के बारे में पता चला और उसी से उसने रिया के मोबाइल का नंबर लिया था । रिया ,सौरभ की बातें सुन कर भावुक हो गई । सौरभ ने रिया को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने  के लिए कहा और बोला की रिया और उसके बच्चे के आगे अभी पूरा जीवन पड़ा हुआ है ,रिया को अपने जीवन को दूसरा मौका देना चाहिए । 

सौरभ की बातों से रिया को काफी ढाँढस मिला और उसे लगा की दुनिया में उसके बच्चे की परवाह करने वाला और भी कोई है  । कुछ ही दिनों के बाद सौरभ इंडिया आया और रिया से शादी कर उसके  बच्चे को अपना कर  ऑस्ट्रेलिया चला गया । जहां प्रेम होता है वे सम्बन्ध निर्भार होते हैं ,उन संबंधों में भारीपन नहीं होता है ।  सौरभ ने दिल से रिया से प्रेम किया था और उसके बच्चे को उसने एक पिता बन कर ही हमेशा प्यार किया । वह बच्चा पिता का प्रेम और  सहयोग पा कर शरीरिक और मानसिक रूप से काफी स्वस्थ होने लगा । 



हुना मैडिटेशन ने रिया के जीवन में उसके बच्चे के साथ साथ उसके जीवन में भी प्रेम और स्थिरता की बढ़ोतरी की ।


Please also go through these links ....


http://geetahealing.blogspot.in/2013/09/blog-post.html


 http://geetahealing.blogspot.in/2014/10/huna-mystic-power-of-ancients.html


https://www.youtube.com/watch?v=A8iIqi0dS-0




Thursday, January 21, 2016

Magic of Prana in Huna Mystic


The Huna masters  recoganised the vital importance of Prana or the life  force energy in performing occult work. We are surrounded by a force without which we would be lost, called universal life force ,vital force or simply Prana . All life and nourishment is maintained through this most vital of all resources. It is a basic tenet of occult belief that this Universal life force energy is charged with electrical energy that,can be utilized to create grater physical and spiritual power.  

Kahuna also recoganised the Prana  as the stuff of life ,the very essence of life itself. For this reason and because of its preciousness the kahuna believed in frequently offering a surplus of Pranic-Energy to the God of ones's being  ,the Higher Self. It was , in fact a sacrificial offering .This is the true , hidden meaning of the concept of offering sacrifices to the Gods. Man typically has perverted this ides by sacrificing his best crops, slaughtering animals and even butchering his own kind in order to please the God. 


In Huna ,However the act of giving surplus Prana to the Higher Self is considered to be more love offering rather than as a sacrifice. The Prana is the substance with which the Higher Self works when we want it to accomplish some objective for us. Prana ,once it has been converted into a higher frequency of power by the Lower Self and sent to the Higher Self,is the force that creates miracles. Once it is in a highly charged state, and directed by the Higher Self ,it can smash atoms and cause dematerialization and rematerialization of matter. 

The Prana breathed in by the conscious Middle Self ,is then converting to a Higher Voltage of electricity by the Lower Self which then sends it up to the Higher Self.The middle self takes in the Prana,the Lower Self converts it and the Higher Self uses it. 

Lower Self needs more Prana than the other selves.The higher Self, being pure and divine  , needs very little Prana except when it is called upon to fulfill a need for the Middle Self. Higher Self will never intervene in one's affairs unless its help is specifically asked for ,by offering surplus Prana to it, is the real core of Huna mystic. 

How Anita Overcome Her Chronicle Fatigue



Anita ,a house wife was always complaining  of her daily burdens.  She was  constantly fatigued. She cooked and cleaned for her husband and hear two children and at the end of the day she collapsed in exhaustion,too tired to even look at television or talking to her husband or helping her children in their studies. Her husband was beginning to tire of her constant complaints and her irritability and seemed less interested in her emotionally because she was chronically tired and could not share in simple little pleasure with him .

Anita consulted a Huna Technique Expert and shared her problem with him. From the expert she learned the Mystical technique to connect with her Higher Self. She performed the Huna Ritual twice a day , for three consecutive weeks .In her meditation she projected that she has become a channel for cosmic energy ,and  with the grace of the dynamic power of cosmic energy she can do her day's tasks joyously . She projected in meditation that cosmic energy is flowing through her mind and body cells, giving her youth,energy and superabundance of vitality. 

Soon Anita became a dynamo of action and delighted her husband and children with her flow of creative energy and loving service. 
through Huna technique the Higher self release mysterious brain waves that profoundly affect the body chemistry and keep it healthy. Higher self can regulate and control the autonomic mechanisms of the body which regulates heart beat, blood pressure,digestion and glandular secretions.


To raise the body's energy level and overcome fatigue and aging, go into the regular habit of Huna Meditation and mentally elevate yourself to the high levels of creativity by visualizing you as a fountain of eternal youth and doing all things you desire , such as cooking, reading, swimming, dancing, playing, painting.