Tuesday, August 18, 2020

5 steps 3 days Formula - to beat Corona or any Influenza like illness without any Medicine



1. Mustard oil pulling in the morning 

Put one tablespoon of mustard oil in your mouth and swish it around in your mouth for 15–20 minutes. Be careful not to swallow any. Spit the oil into a trash can once you're done and then rinse your mouth 2-3 times with plain water. Do not brush your teeth immediately after oil pulling instead you can brush your teeth in the night before sleep. repeat mustard oil pulling in the morning for 3 consecutive days. Mustard oil has antibacterial, antifungal, and antiviral properties.

2. Salt  bath


After oil pulling takes a salt bath. Take one full table-spoon common salt  /Epsom salt/rock salt in appx 4 liters of water in a bucket. Take bath with this saltwater. After bath don't rub your body vigorously with a towel. Wear loose clothes after bath over the wet body. Salt has antiseptic, detoxifying, and cleansing properties. 


3. Hot tea 

Take ginger+ black paper tea twice a day and green tea with ginger and lemon once every day for 3 days


4. Massage feet soles 



Apply Vicks vaporub/volini/omnigel/ any pain-relieving ointment on your feet  (including your soles and between fingers) and massage your feet (including soles).  Massage up to the ankles and immediately wear woolen socks for 1 hour. After one hour you may remove the socks. Repeat this process at least thrice daily for three days consecutively.


5. Drink only normal/lukewarm water 


Drink only normal water for three days and avoid any cold or chilled food items for 3 days. If possible avoid animal-dairy-processed food products of 3 days.

Within 3 days automatically you will get rid of symptoms of fever, fatigue, cough, sore throat, etc, and fully cured of influenza, running nose, sneezing,  fever, cough-cold, allergic rhinitis, flu, corona, etc.

   
Important points to remember .......Immediately  follow  5 steps remedial formula for 3 consecutive days as soon as  you face following symptoms 


common symptoms

fever

dry cough

tiredness

Less common symptoms:


aches and pains

sore throat

diarrhea

conjunctivitis

headache

loss of taste or smell

a rash on the skin, or discoloration of fingers or toes

Serious symptoms:

difficulty breathing or shortness of breath

chest pain or pressure

loss of speech or movement 


 5 steps 3 days formula
  1. Mustard oil  pulling in the morning, empty stomach --- once, for 3 days 
  2. Salt bath in morning - once, for 3 days 
  3. Drinking tea three times a day, normal tea with ginger+ black paper twice and green tea with ginger + lemon once .... thrice, 3 days 
  4. Rubbing Vicks vaporub/ omni gel/ volini ointment on feet soles ...... thrice, 3 days 
  5. Drinking only normal water and not taking chilled / cold /animal/dairy/processed food items for 3 days. 

Wednesday, August 12, 2020

New Education Policy 2020 (नई शिक्षा नीति-2020)

New Education Policy 2020: All you need to know | India News ...

कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति (New Education Policy 2020) को हरी झंडी दे दी है. 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है. नई शिक्षा नीति की उल्लेखनीय बातें सरल तरीके की इस प्रकार हैं: 

----5 Years Fundamental---
1.  Nursery    @4 Years 
2.  Jr KG        @5 Years
3.  Sr KG        @6 Years
4.  Std 1st     @7 Years 
5.  Std 2nd    @8 Years

---- 3 Years Preparatory---
6.  Std 3rd     @9 Years 
7.  Std 4th     @10 Years 
8.  Std 5th     @11 Years 

----- 3 Years Middle---
9.  Std 6th     @12 Years 
10.Std 7th     @13 Years 
11.Std 8th     @14 Years

---- 4 Years Secondary---
12.Std 9th     @15 Years 
13.Std SSC    @16 Years 
14.Std FYJC  @17Years 
15.STD SYJC @18 Years 

खास बातें :

----केवल 12वीं क्‍लास में होगा बोर्ड। कॉलेज की डिग्री 4 साल की।10वीं बोर्ड खत्‍म। MPhil भी होगा बंद।

---- अब 5वीं तक के छात्रों को मातृ भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में ही पढ़ाया जाएगा. बाकी विषय चाहे वो अंग्रेजी ही क्यों न हो, एक सब्जेक्ट के तौर पर पढ़ाया जाएगा।
 
----अब सिर्फ 12वींं में बोर्ड की परीक्षा देनी होगी. जबकि इससे पहले 10वी बोर्ड की परीक्षा देना अनिवार्य होता था, जो अब नहीं होगा।

----9वींं से 12वींं क्लास तक सेमेस्टर में परीक्षा होगी. स्कूली शिक्षा को 5+3+3+4 फॉर्मूले के तहत पढ़ाया जाएगा (ऊपर का टेबल देखें)।

----कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी. यानि कि ग्रेजुएशन के पहले साल पर सर्टिफिकेट, दूसरे साल पर डिप्‍लोमा, तीसरे साल में डिग्री मिलेगी।

----3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं लेना है. वहीं हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी. 4 साल की डिग्री करने वाले स्‍टूडेंट्स एक साल में  MA कर सकेंगे।

---अब स्‍टूडेंट्स को  MPhil नहीं करना होगा. बल्कि MA के छात्र अब सीधे PHD कर सकेंगे.

----स्‍टूडेंट्स बीच में कर सकेंगे दूसरे कोर्स. हायर एजुकेशन में 2035 तक ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 50 फीसदी हो जाएगा. वहीं नई शिक्षा नीति के तहत कोई छात्र एक कोर्स के बीच में अगर कोई दूसरा कोर्स करना चाहे तो पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक लेकर वो दूसरा कोर्स कर सकता है. 

----हायर एजुकेशन में भी कई सुधार किए गए हैं. सुधारों में ग्रेडेड अकेडमिक, ऐडमिनिस्ट्रेटिव और फाइनेंशियल ऑटोनॉमी आदि शामिल हैं. इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कोर्स शुरू किए जाएंगे. वर्चुअल लैब्स विकसित किए जाएंगे. एक नैशनल एजुकेशनल साइंटफिक फोरम (NETF) शुरू किया जाएगा. बता दें कि देश में 45 हजार कॉलेज हैं.

----सरकारी, निजी, डीम्‍ड सभी संस्‍थानों के लिए होंगे समान नियम।

 (This new education policy will be implemented from  2021-22  session onward  )

Monday, August 3, 2020

विभाजित संपत्ति और अविभाजित जिम्मेदारियां

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आज हमारे भारतीय समाज में थोक के भाव बहनों ने भाईयों के ऊपर पैतृक सम्पति को लेकर कोर्ट केस किया हुआ हैं. हमारे समाज में जहाँ सगे भाईयों और गोतिया में सम्पति के बंटवारे को लेकर तलवारें खिंची रहती हैं वहां बहनों का यह एलाने- जंग कुछ गंभीर मुद्दों को उठता हैं. यह मुद्दा जहाँ वैधानिक ,सामाजिक और आर्थिक हैं वहीँ इसके मनोवैज्ञानिक पहलूओं पर भी नज़र डालनी चाहिए.

 

कुछ एक साल पहले हमारे भारतीय समाज़ की एक नव-विवाहित लड़की ने बहुत महत्पूर्ण सवाल उठायाथा.उस लड़की का विवाह एक अत्यंत प्रतिष्टित परिवार में हुआ था. ससुराल में सास ससुर के अलावा उसकी पांच ननदें थी. विवाह के कुछ समय पश्चात ही ननदों ने मायके में पूर्वजों की पैतृक सम्पति पर अपना अधिकार माँगा. सास- ससुर भी सहृदय अपनी पुत्रियों को हिस्सा देने को तैयार हो गए. गौर करने की बात यह हैं की उन पांचो ननदों का विवाह सम्मानित और समृद्ध परिवारों में हुआ हैं और उनके पत्तियों की प्रस्थिति काफी अच्छी थी,तथा उनका विवाह भी प्रचुर दान -दहेज़ देकर किया गया था.

 तब पुत्र -वधु ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही उसने कहा की उत्तराधिकार के बंटवारे के साथ कर्तव्यों का भी बंटवारा होगा . अगर सम्पति के 6 हिस्से हुए तो माता- पिता जी, जो अब तक बेटे- बहु के साथ रहते थे अब साल के दो महीने हरेक संतान के साथ रहेंगे .इस प्रकार माता पिता साल में केवल दो महीने ही बेटा-बहु के साथ रहेंगे. 

यह सुन कर बेटियों ने विद्रोह कर दिया और कहा की अगर वो माता- पिता को रखेंगी तो उनके अपने सास-ससुर कहाँ जायँगे ? इस पूरे प्रकरण में विचारने योग्य तथ्य यह हैं की सास ने खुद अपनी ननदों को अपने ससुराल की सम्पति में से फूटी कौड़ी भी नहीं दी थी.लेकिन अपनी समृद्ध बेटियों को वो उत्तराधिकार में हिस्सा दे रहीं हैं.

यह महिलाओ की जटिल और दोहरी मानसिकता हैं. उनकी ननद या बेटी की ननद अगर अपनी पैतृक सम्पति में अपना हिस्सा मांगती हैं तो वो लालची और घर तोड़ने वाली होती हैं ,लेकिन यही काम अपनी बेटी करती हैं तो वो जरूरतमंद और वैधानिक होती हैं.

'येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:। '  (इस श्लोक या मन्त्र का अर्थ है कि जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षाबंधन से मैं तुम्हें  बांधती हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा| हे रक्षे!( रक्षासूत्र) तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो। )कहते हुए ना जाने कितनी बार हमने अपने भाईयों की कलाइयों में राखी बांध कर आजीवन अपनी रक्षा का वचन माँगा हैं. आज हमें यकीन नहीं रहा की भाभी के आने के बाद वही भाई हमारी रक्षा करनेका टाइम निकाल सकता हैं.खून पानी से गाढ़ा ही होता हैं , विपत्ति पड़ने पर प्रत्येक भाई अपनी बहन की रक्षा करेगा ही, इस पर विश्वास करना चाहिए. यदि हम बहने अपने मायके में अपने अधिकारों की मांग भी करती हैं हमें अपने ससुराल की बेटियों को भी उनका हक़ देना चाहिए और अधिकारों की मांग के साथ अपने कर्तव्यो को निभाने की कुब्बत भी होनीचाहिए. 

वैधानिक कानून सामाजिक परिवर्तन नहीं ला सकते हैं.जब हमारे हृदय परिवर्तित होंगे तभी समाज बदलेगा ,और फिर अपने भाई की एक मुस्कान के ऊपर तीनों जहान की दौलतें कुर्बान.

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वन्दना तिवारीवन्दना तिवारी

मन के झरोखे से दिखने वाले दृश्य मेरे विचारों में अभिव्यक्ति पाते हैं।

Monday, July 27, 2020

डॉ. लक्ष्मीकांत सहाय - एक युग का अंत

भागलपुर चिकित्सा जगत के पितामह और आरएसएस के पुरोधा डॉ लक्ष्मीकांत सहाय का निधन

भागलपुर चिकित्सा जगत के पितामह और आरएसएस के पुरोधा डॉ लक्ष्मीकांत सहाय का निधन

भागलपुर के जाने-माने आंख नाक कान और गला रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ लक्ष्‍मीकांत सहाय का निधन हो गया। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे।



 भागलपुर चिकित्सा जगत के पितामाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरोधा डॉ. लक्ष्मीकांत सहाय का निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे। वे पिछले छह माह से बीमार थे। उनका निधन भागलपुर में 26 जुलाई 2020 की मध्य रात्रि को हो गया। उनके पुत्र राजेश सहाय ने बताया कि 28 जुलाई को बरारी श्‍मशान घाट में उनका दाह संस्‍कार होगा। उनके कुछ स्‍वजनों के आने का इंतजार है।
चिकित्‍सा जगत में शोक
डॉ सहाय जवाहर लाह नेहरू चिकित्‍सा महाविद्यालय में आंख, नाक, कान और गले संबंधी रोगों के विभागाध्‍यक्ष भी रहे थे। उनके निधन से भागलपुर के चिकित्‍सा जगत में शोक है। आरएसएस सहित उनके अनुशांगिक संगठनों के अलावा कई सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर दुख व्‍यक्‍त किया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काफी करीबी रहे
डॉ लक्ष्‍मीकांत सहाय ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उसके अनुशांगिक संगठन और समाज के लिए समर्पित कर दिया था। आरएसएस के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था। वे संघ संस्‍थापक आद्य सरसंघचालक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन से काफी प्रभावित थे। वे हमेशा डॉ हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक डॉ माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर 'गुरुजी' के व्‍यक्तित्‍व का अध्‍ययन करते रहते थे। स्‍वामी विवेकानंद ने भी उनके जीवन पर काफी प्रभाव छोड़ा था।
भागलपुर के तत्‍कालीन विभाग प्रचारक उद्यम चंद्र शर्मा के प्रयास से उन्‍हें संघ में दायित्‍व दिया गया। उसके बाद वे भागलपुर जिला के संघचालक बने। संघ के प्रति निष्‍ठा और समर्पण के कारण उन्‍हें इसके बाद भागलपुर विभाग का संघचालक बना गया। जिसके अंतर्गत भागलपुर और बांका दो जिले आते हैं। वे कई वर्षों तक विभाग संघचालक रहे। संघ के केंद्रीय अधिकारी ने इसके बाद उन्‍हें दक्षिण बिहार का प्रांत संघचालक का दायित्‍व दे दिया। उन्‍होंने लंबे समय तक तीनों संघचालक के रूप में द‍ायित्‍व निभाया। वर्तमान सरसंघचालक डॉ मोहन राव भागवत से उनके काफी मधुर संबंध थे। जब मोहन राव भागवत अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख सह उत्‍तर-पूर्व क्षेत्र प्रचारक थे, उसी समय डॉ सहाय को भागलपुर जिला संघचालक का दायित्‍व मिला था। इस कारण डॉ मोहन राव भागवत और डॉ लक्ष्‍मीकांत सहाय का अक्‍सर कार्यक्रमों और बैठकों में लगातार मिलना-जुलना होता रहता था।
तीन सरसंघचालक का उन्‍हें मार्गदर्शन मिला
डॉ लक्ष्‍मीकांत सहाय को तीन सरसंघचालक का मागदर्शन मिला है। उन्‍होंने संघ के चौथे सरसंघचालक प्रो डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह 'रज्‍जू भैया' के कार्यकाल से संघ कार्य दायित्‍व लेकर करना शुरू किया था। इसके बाद पांचवें सरसंघचालक केएस सुदर्शन और वर्तमान सरसंघचालक डॉ मोहन राव भागवत के नेतृत्‍व में भी उन्‍होंने संघ कार्य किया। उन्‍हें आरएसएस के  द्वितीय सरसंघचालक डॉ माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर 'गुरुजी' को भी सुनने का अवसर मिला था। उन्‍होंने संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में भागलपुर में हिंदुओं पर हुए उत्‍पीड़न के बारे में भी जानकारी संघ के अधिकारियों को दी थी। कुछ वर्ष पहले उन्‍होंने अस्‍वस्‍थ हो जाने के कारण दक्षिण बिहार के सह प्रांत संघचालक का दायित्‍व छोड़ दिया।



Sunday, May 3, 2020

श्री राम राघो यही प्रार्थना है

श्री राम राघो यही प्रार्थना है

ऐ राम ! हे राम ! मैं भजन हीन हूँ ,साधन हीन हूँ ,ज्ञान हीन  हूँ ,भक्ति हीन हूँ ,क्रिया हीन हूँ, राम ! शरणागत हूँ | मैं देह-सुख नहीं चाहता | अष्ट-सिद्धि तो क्या, शत सिद्धियाँ भी नहीं चाहता | मैं शरणागत हूँ,शरणागत | बस वही करो जिससे तुम्हारे पादपद्मों में शुद्ध भक्ति हो, और तुम्हारी भुवनमोहिनी माया से मैं मुग्ध न होऊँ | राम ! मैं शरणागत हूँ |
- श्री रामकृष्ण परमहंस 




हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे ।हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण  हरे हरे ।।

प्रार्थना

श्री राम राघो यही प्रार्थना है ।
सीतापते हे यही भावना है ।।
निष्काम होके गाऊं निरन्तर ।
रघुनाथ मेरी यही कामना है ।।
श्री राम राघो रघुवंष भूषण ।
मेरे हरो नाथ त्रय ताप दूषण ।।
दे दो सुबुद्धि गाता रहूं मै ।
श्रीराम रघुनन्दन राघवेती ।।
हे राम राघो त्रय ताप हारी ।
मेरी सुनो हे सारंग धारी ।।
ध्याता युगल रूप तन नाथ त्यागुं ।।
गाता तजूं प्राण श्री राम सीता  ।
देहान्त काले प्रभु सामने हो ।।
वैदेही सहित सारंग पाणी ।
भगवान मेरी यही प्रार्थना है ।।
रघुनाथ मेरी यही याचना है ।।  

बार बार वर माँगउ हरषि देहु श्री रंग |  
पद सरोज अनुपायनि ,भगति सदा सत्संग || 

द्वारा 
भागवत  ठाकुर 



सुतापा ने क्या कहा ?


अभिनेता इरफान खान के निधन के दो दिन बाद उनके परिवार ने आधिकारिक बयान जारी किया है। सुतापा का पूरा बयान, जो उन्होंने जारी किया……


"जब पूरी दुनिया इसे व्यक्तिगत हानि के रूप में देख रही है तो मैं फैमिली स्टेटमेंट कैसे लिख सकती हूं? जब लाखों लोग इस समय हमारे साथ हैं तो मैं अकेली महसूस करना कैसे शुरू कर सकती हूं? मैं सभी को आश्वस्त करना चाहती हूं कि यह नुकसान नहीं है, यह एक लाभ है। यह उन चीजों का लाभ है, जो उन्होंने हमें सिखाई थीं और अब हम इसे लागू और विकसित करना शुरू करेंगे। फिर भी मैं उस बारे में बात करने की कोशिश करना चाहती हूं, जो लोग पहले से नहीं जानते हैं।

यह हमारे लिए अविश्वसनीय है, लेकिन मैं इसे इरफान के शब्दों में रखूंगी, 'यह जादुई है।' चाहे वे यहां हो या न हों। और उन्होंने जो प्यार किया, वो एकतरफा नहीं था। मुझे उनसे सिर्फ एक शिकायत है कि उन्होंने मुझे जिंदगीभर के लिए बिगाड़ दिया है। परफेक्शन के लिए उनका प्रयास मुझे किसी भी चीज में साधारण समझौता नहीं करने देता। एक लय थी, जो उन्होंने हमेशा हर चीज में देखी।  यहां तक कि कैकोफनी और अराजकता में भी। इसलिए मैंने लय के साथ गाना और नाचना सीख लिया है।

अंततः हमारी जिंदगी एक्टिंग में मास्टर क्लास थी। इसलिए जब बिन बुलाए मेहमान की नाटकीय एंट्री हुई, तो मैंने  कोलाहल में एक सामंजस्य बनाना सीख लिया। डॉक्टर की रिपोर्ट उन स्क्रिप्ट्स की तरह थी, जिन्हें मैं परिपूर्ण करना चाहती थी, इसलिए मैंने कभी भी उनके परफॉर्मेंस की कमी में एक भी डिटेल को मिस नहीं किया। इस जर्नी में हम कई दिलचस्प लोगों से मिले और सूची अंतहीन है। लेकिन कुछ लोगों को मैं मेंशन करना चाहूंगी। हमारे ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नितेश रोहतगी (मैक्स अस्पताल, साकेत), जिन्होंने हमारा हाथ शुरुआत से ही थामे रखा था। डॉ. डेन क्रेल (यूके), डॉ. शिद्रवी (यूके), मेरी धड़कन और अंधेरे में उजाले की तरह डॉ. सेवंती लिमये (कोकिलाबेन अस्पताल)।

समझा पाना मुश्किल है कि यह जर्नी कितनी शानदार, खूबसूरत, खुशनुमा और दर्दभरी रही। मुझे लगता है कि इस ढाई साल के अंतराल इरफान में इरफान ने ऑर्केस्ट्रा कंडक्टर की भूमिका निभाई, जो उनके साथ शुरुआत, मध्य और परिणति थी। हम 35 साल तक एक-दूसरे के साथ जुड़े रहे। हमारी शादी नहीं हुई थी, यह एक मिलन था। मैंने अपने छोटे से परिवार को एक नाव में देखा, जहां मेरे दोनों बेटे पैडल मार रहे थे और इरफान उनका मार्गदर्शन कर रहे थे कि वहां नहीं, यहां मोड़ो। लेकिन चूंकि जिंदगी सिनेमा नहीं है और यहां रीटेक नहीं होते। इसलिए मैं ईमानदारी से चाहती हूं कि मेरे बेटे अपने पिता के मार्गदर्शन में नाव को सुरक्षित रूप से चलाएं और तूफान से रॉकबाय करें।

मैंने अपने बच्चों से कहा है कि अगर संभव हो तो वे अपने पिता द्वारा सिखाए गए सबक को अपनी जिंदगी में जोड़ें, जो कि उनके लिए जरूरी है। बाबिल अनिश्चितता के नृत्य के लिए आत्मसमर्पण करना सीखें और ब्रह्मांड में अपने यकीन पर विश्वास करें। अयान अपने मन को नियंत्रित करना सीखें और अपने आपको इसके नियंत्रण में न आने दें। आंसू बहेंगे, जब हम उनका पसंदीदा पेड़ रात की रानी उस जगह लगाएंगे, जहां उन्हें शानदार विजयी यात्रा के बाद दफनाया गया। यह समय लेता है, लेकिन खिल जाएगा और खुशबू फैलकर उन सभी को स्पर्श कर लेगी, जिन्हें मैंने फैन्स नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों का परिवार कहा था।"

Sunday, January 26, 2020

Color version of old B / W movies. Make the most of your free time to watch these movies

 *Color version of old B / W movies. Make the most of your free time to watch these movies.*


1. *Munimji (1955)*

https://youtu.be/AMnyj32QY9s


2. *Kathputli (1957)*

https://youtu.be/waHxaYYORq4


3. *Jan Pahchan (1950)*

https://youtu.be/WjAeC9K5Nbc


4. *Solva Saal (1958)*

https://youtu.be/_YqeWmhOZqo


5. *Biraj Bahu (1954)*

https://youtu.be/W-ydx6DYTDE


6. *Do Ustad (1959)*

https://youtu.be/o3tP6esVP9Y


7. *Raj Hath (1956)*

https://youtu.be/mrB7_Ayi_mk


8. *Khazanchi (1941)*

https://youtu.be/stIrd9HwdX4


9. *Sanam (1950)*

https://youtu.be/XBfnD03aGDg


10. *Abe Hayat (1955)*

https://youtu.be/fpDwk74tCyQ


11. *Chhoti Bahen (1959)*

https://youtu.be/osX37-r-nFk


12. *Jailor (1958)*

https://youtu.be/-lMCBt-lRWQ


13. *Samrat Chandrgupt (1958)*

https://youtu.be/WslBL3xT4ZI


14. *Ek Saal (1957)*

https://youtu.be/s08kBN_GOuo


15. *Najma (1943)*

https://youtu.be/KBt07nulQ7o


16. *Nastik (1954)*

https://youtu.be/tIHH35b_tUE


17. *Mirza Sahiban (1947)*

https://youtu.be/-vQjjW5xrB8


18. *Lal Haveli (1944)*

https://youtu.be/Ga8a8T1Ms6c


19. *Rani Rupmati (1957)*

https://youtu.be/Wvbk405vvaw


20. *Tarana (1951)*

https://youtu.be/bmgwSsANzmw


21. *Pukar (1939)*

https://youtu.be/SwEPBqh9IWg


22. *Nau Do Gyaraha (1957)*

https://youtu.be/b1MT9vK4yQA


23. *Seema (1955)*

https://youtu.be/8GUF45GkGo0


24. *Sangdil (1952)*

https://youtu.be/EQjEuMrJKTM


25. *Sharada (1957)*

https://youtu.be/U1nludCDuH0


26. *House No 44 (1955)*

https://youtu.be/y4OLdXIh4Gk


27. *Ek Hi Raasta (1956)*

https://youtu.be/cPdr4G1ZCN0


28. *Phagun (1958)*

https://youtu.be/-QRUD5uIT8g


29. *Parivar (1956)*

https://youtu.be/8buYQnaEzRE


30. *Basant Bahar (1956)*

https://youtu.be/2TmkPrfNgio


31. *Insan Jag Utha (1959)*

https://youtu.be/D_lEgc7RZUo


32. *Parineeta (1953)*

https://youtu.be/m4tSI-q1Qgg


33. *Dhool Ka Phool (1959)*

https://youtu.be/pdiIIfkOT84


34. *Apradhi Kaun (1957)*

https://youtu.be/SeutkdWaBSo


35. *Sahara (1958)*

https://youtu.be/WbTJz-bPDwM


36. *Aag (1948)*

https://youtu.be/3nQTsl7sQxQ


37. *Badal (1951)*

https://youtu.be/3SpsnTEARlQ


38. *Sujata (1959)*

https://youtu.be/Cucrm4nIDZM


39. *Shaheed (1948)*

https://youtu.be/t61tNnrNIkA


40. *Aah (1953)*

https://youtu.be/xsLU2fA30Y8


41. *Morni (1956)*

https://youtu.be/bTCgWjbgV_A


42. *Dil Deke Dekho (1959)*

https://youtu.be/Icw-b_RPzps


43. *Ujala (1959)*

https://youtu.be/Voj-dOFF5LM


44. *Daag (1952)*

https://youtu.be/cgZK-hm1WZc


45. *Afasana (1951)*

https://youtu.be/dt4hXP1UBJ4


46. *Sadhna (1958)*

https://youtu.be/c9iSEUhZCo4


47. *Chirag Kahan Roshni Kahan (1959)*

https://youtu.be/3ZQW7Nt9J-E


48. *Mirza Ghalib (1954)*

https://youtu.be/eOaWO8o9zYM


49. *Mela (1948)*

https://youtu.be/B29Odynx4AI


50. *Goonj Uthi Shehnai (1959)*

https://youtu.be/O0KapR--GUk


51. *Raj Tilak (1958)*

https://youtu.be/JhYWKJoup1I


52. *Pocket Maar (1956)*

https://youtu.be/gKodGa0gwHM


53. *Kaagaz Ke Phool (1969)*

https://youtu.be/gmexCC02M_Q


54. *Kali Topi Lal Rumal (1959)*

https://youtu.be/a2D5qwOyk_8


55. *Miss Mary (1957)*

https://youtu.be/HGqtTCIOjvA


56. *Andaz (1949)*

https://youtu.be/sXrvTHjR4AI


57. *Dillagi (1949)*

https://youtu.be/Oo4WknneMKg


58. *Love Marriage (1959)*

https://youtu.be/3s1VF3kqzZQ


59. *Patanga (1949)*

https://youtu.be/Z_2_gAESuvU


60. *Anand Math (1952)*

https://youtu.be/x43R2GKt6D8


61. *Jagte Raho (1956)*

https://youtu.be/BJ7o1ZqyCg0


62. *Uran Khatola (1955)*

https://youtu.be/-C4B73lb6Aw


63. *Barsaat (1949)*

https://youtu.be/Ah_UBSUAprQ


64. *Chhoo Mantar (1958)*

https://youtu.be/Dk53yg8Fc8o


65. *Paigham (1959)*

https://youtu.be/-XjpFlMdJKU


66. *Anari (1959)*

https://youtu.be/UgPIdP24ChI


67. *Albela (1951)*

https://youtu.be/7zRLfmpNx-c


68. *Mr & Mrs 55 (1955)*

https://youtu.be/LEou8ZY6EQc


69. *Amar (1954)*

https://youtu.be/7x-rmrAmQnk


70. *Jugnu (1947)*

https://youtu.be/TxwIP9yUOkI


71. *Babul (1955)*

https://youtu.be/hLsaENrElr8


72. *Chandrlekha (1948)*

https://youtu.be/Y2Y1TiCh0rs


73. *Azad (1955)*

https://youtu.be/Db6cFtJ_HrA


74. *Awaara (1951)*

https://youtu.be/wTamciZrEhs


75. *Baiju Bawra (1952)*

https://youtu.be/MFyjHLWfsFc


76. *Kala Pani (1958)*

https://youtu.be/AOSVQ1Bftbg


77. *Pyaasa (1957)*

https://youtu.be/QdsfMtmimHw


78. *Bahar (1951)*

https://youtu.be/Av7M5z8n7VQ


79. *Baazi (1951)*

https://youtu.be/R--Kfsjjj9c


👆पुरानी सदाबहार फ़िल्में

Sunday, March 3, 2019

महामृत्युंजय मन्त्र !!!!

शिव तत्व

विश्व भर में जो मूल प्रकृति ईश्वरी शक्ति है , उस प्रकृति द्वारा पूजित देव शिव कहलाते हैं . “ शि ” का अर्थ है पापों का नाश करने वाला और “व ” कहते हैं मुक्ति देने वाले को . शिव में दोनों गुण हैं . शिव वह मंगलमय नाम है जिसकी वाणी में रहता उसके करोड़ों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं . शिव शब्द कल्याणकारी है और कल्याण शब्द मुक्तिवाचक है . यह मुक्ति भगवान शंकर से प्राप्त होती है अतः वे शिव कहलाते हैं . भगवान शिव विश्वभर के मनुष्यों का सदा “शं ” या कल्याण करते हैं और कल्याण मोक्ष को कहते हैं इसलिए वे शंकर भी कहलाते हैं .

शिव अखंड , अनंत , निर्विकार , चिदानंद, परमात्मा तत्व हैं . जो अनन्त अन्तःकरणों माया भेद में प्रतिबिम्बित होते हैं. अंतःकरण गत प्रतिबिम्बित ही जीव कहलाता है और मायागत प्रतिबिम्बित ही ईश्वर कहलाता है .

शिव ही समस्त प्राणियों के अंतिम विश्राम के स्थान हैं . अनंत पापों से उद्गिन होकर विश्राम के लिए प्राणी जहाँ शयन करे, उसी सर्वाधिष्ठान , सर्वाश्रय को शिव कहा जाता है .

जागृत , स्वप्न और सुषुप्ति तीनों अवस्थाओं से रहित , सर्व दृश्य , विवर्जित, स्वप्रकाश, सच्चिदानंद परब्रह्म ही शिव तत्व है . शिव ही परम शिव और दिव्य शक्तियों को धारण कर अनंत ब्रह्मांडों का उत्पादन, पालन और संहार करते हुए ब्रह्म, विष्णु शंकर आदि संज्ञाओं को धारण करते हैं .

मृत्यु और अमृत तत्व

जब शरीर निश्चेष्ट हो जात है और उसमें चेतन का कोई भी लक्षण नही रहता है तो हम कहते हैं की उसकी मृत्यु हो गई है . स्थूल शरीर से सूक्ष्म शरीर का अलग हो जाना ही मृत्यु है . मृत्यु के उपरांत जीव नया शरीर धारण करता है . वर्तमान शरीर को त्याग कर शरीरांतर ग्रहण करने पर भी जिन्हें पूर्व जन्म की स्मृति बनी रहती है उनकी मृत्यु , मृत्यु नहीं कही जाती है क्योंकि उनके ज्ञान की सन्तति विच्छिन्न नही होती है . उन्हें “इच्छा मृत्यु ”या “अमर ”आदि नामों से भी पुकारा जाता है . उन्होंने अमृत तत्व का लाभ कर लिया होता है . नए - नए शरीर में प्रवेश करने पर भी उनका ज्ञान और पूर्व जन्म की स्मृति लुप्त नही होती है . वे “जाति – स्मर ” कहलाते हैं .

अज्ञान युक्त देहादि प्रकृति के परिवर्तन के साथ “मैं ” भी परिवर्तित हो रहा हूँ , इस प्रकार का ज्ञान होना ही अज्ञान है . परिवर्तन का नाम ही मृत्यु है और इससे विपरीत ज्ञान की , प्रकृति के परिवर्तन के साथ मेरा परिवर्तन नहीं होता है , यही ज्ञान ही अमृत तत्व है . परिवर्तन शील “मैं ” के अन्दर एक नित्य स्थिर “मैं ” है जिसका परिवर्तन नहीं होता है , जो इन सारे परिवर्तनों का साक्षी है और उन्हें परिवर्तन रूप से जानता है .

ऐसे मुक्त- पुरुष संसार के बंधन से मुक्त हो जाने पर जीवों के कल्याण हेतु एक या अधिक बार शरीर धारण कर जगत में आवागमन करते हैं . ये लोग मृत्यु तथा प्राण तत्व पर विजय प्राप्त किये रहे हैं और मृत्यु इनके वशवर्ती रहती है. अमृत्व तत्व धारण करने के कारण ये सदा नित्य , ज्ञानमय और आनंदमय भाव में अवस्थित रहते हैं .

महामृत्यंजय मन्त्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीयमामृतात् ॥

हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की अराधना करते हैं, जो प्रत्येक श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते हैं, जो सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से कर रहे हैं. उनसे हमारी प्रार्थना है कि वे हमें मृत्यु के बंधनों से मुक्त कर दें, जिससे मोक्ष की प्राप्ति हो जाए. जिस प्रकार एक ककड़ी अपनी बेल में पक जाने के उपरांत उस बेल-रूपी संसार के बंधन से मुक्त हो जाती है, उसी प्रकार हम भी इस संसार-रूपी बेल में पक जाने के उपरांत जन्म-मृत्यु के बन्धनों से सदा के लिए मुक्त हो जाएं, तथा उनके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए शरीर को त्यागकर आप ही में लीन हो जाएं .

महामृत्युंजय शिव

मृत्यु पर जय प्राप्त करने वाले और अमृत का लाभ करने वाले मृत्युंजय हैं . शास्त्रों में मृत्युंजय महादेव के ध्यान के जो श्लोक मिलते हैं उनमें वेदोक्त त्र्यम्बक मन्त्र से मृत्युंजय शिव का स्वरूप जाना जा सकता है . भगवान मृत्युंजय के जप ध्यान की विधि मार्कंडेय , राजा श्वेत आदि के काल भय निवारण की कथा शिवपुराण , स्कन्ध पुराण , काशी खंड, पद्मपुराण आदि में आती है . आयुर्वेद ग्रंथों में मृत्युंजय - योग मिलते हैं .

महामृत्युंजय शिव का स्वरुप

त्र्यम्बकं शिव अष्ठभुज हैं . उनके एक हाथ में अक्षमाला और दुसरे में मृग - मुद्रा है , दो हाथों से दो कलशों में अमृत रस लेकर उससे अपने ऊपर मस्तक को आप्लावित कर रहे हैं और दो हाथों से उन्हें उन्होंने अमृत कलशों को थामा हुआ है .




दो हाथ उन्होंने अपने अंक पर रख छोड़े है और उनमें दो अमृत पूर्ण घट है . वे पद्म पर विराजमान है , मुकुट पर बाल चन्द्र सुशोभित है जिसकी अमृतवृष्टि से उनका शरीर भींगा हुआ है , ललाट पर तीन नेत्र शोभायमान हैं , उनके वाम भाग में गिरिराजनान्दिनी उमा विराजमान हैं . ऐसे देवाधिदेव श्री शंकर की हम शरण ग्रहण करते हैं .

शिव सदैव अमृत रूप हैं और अमृत में ही सराबोर रहते हैं .

मृत्युंजय शिव का आध्यत्मिक रहस्य

अमृत प्रवाह नाडी, स्पंदन अथवा गति के सूचक है . जिन दो धाराओं के द्वारा शिव अपने मस्तक को सदा आप्लावित करते हैं , वे गंगा - यमुना, सूर्य - चन्द्र के प्रवाह की इड़ा और पिंगला नाडी है, जो रज और तम की वाचक हैं . इन्हीं दोनों शक्तियों के कारण ही जगत की जागतिक क्रिया कलाप होते हैं . जब दोनों शक्तियाँ साम्यावस्था में होती हैं तो तभी प्रकृति -ज्ञान रूप का या सरस्वती का प्रवाह दृष्टिगत होता है, यही सुषुम्ना अथवा विशुद्ध सत्त्व है .

त्र्यम्बकेश्वर शिव के महा मृत्युंजय मन्त्र के जाप से इन दोनों धाराओं को शुद्ध और समन्वित कर मध्यम स्थित सुषुम्ना को जागृत कर विशुद्ध सत्त्व तत्व की प्राप्ति की जा सकती है . ऐसे जातक जगत के परिवर्तन अथवा मृत्यु के राज्य से त्राण पा लेते हैं .

महामृत्युंजय मन्त्र के जाप से लाभ

मृत्युंजय शिव संसार की समस्त औषधियों के स्वामी, मृत्यु के नियंत्रक , आरोग्य और स्वास्थ्य के प्रदाता हैं . इस जटिल और तनाव युक्त जीवन में इस मन्त्र द्वारा अकस्मित दुर्घटनाओं से जीवन की रक्षा की जा सकती है . रोगों का निवारण भी किया जा सकता है . भाव, श्रद्धा तथा भक्ति से इस मन्त्र का जाप करने पर भयंकर व्याधियों का भी विनाश हो सकता है . यह मन्त्र मोक्ष साधन है और दीर्घायु, शन्ति, धन -संपत्ति , तुष्टि तथा सदगति भी प्रदान करता है .


This is powerful healing with the grace of Lord Maha Mritunjay. Maha Mritunjay mantra has a vibration frequency of around 490 Hertz. So, this works very fast. This is an accurate system in the world, based on the present mental state of the person and can remove the evil plenary affecting our lives and bring positive effects. This is a powerful and accurate technique to remove almost all life problems.


द्वारा
गीता झा

Wednesday, February 27, 2019

Huna Meditation : To Open Mystical Doors to Cosmic Consiousness

We are told "For what shall it profit a man if he gains the world and lose his own soul? " 

 Throughout the centuries there have been illumined souls who have been able to probe secrets of the universe and bring to humanity brilliant ideas that have an advanced civilization to great heights of achievement.

These illumined souls men and women did not possess extraordinary minds. They used their mind power differently from ordinary mortals. These great souls used the power of meditation to open mystic doors to cosmic consciousness. They performed their seeming miracles because they tapped strata of mental and spiritual power which caused them to become illumined.

No matter with what limitations you were born, if you possess an innate desire to elevate yourself, to expand your consciousness you may achieve the great heights that these Illuminati attained.

Your soul is on a mystical journey through time and space in a search for the magnificent life. The entire purpose for living is not just to meet life's challenges and overcome them so we may know happiness, but it is so that the soul may achieve the spiritual grandeur and absolute cosmic power to raise triumphantly above life's challenges.


With Huna Meditation you can tap the occult realms that will open the doors to the invisible occult mysteries of the universe.

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HUNA RITUAL OUTLINE:


• Sit comfortably with closed eyes. Take 4 or 5 deep breaths. Completely aware of vital prana entering your body

• Now visualize the absorbed prana being converting into a very high voltage silver-white ball in your solar plexus.

• Now see a tremendous flow of white light surging up out of your solar plexus. Like an active volcano erupting thousands of volts of shattering spiritual electricity.

• See it zooming up out of your head about 5 feet high.

• Now see the light enlarging into a huge circle over your head.

• The super-charged prana is absorbed by your higher self

• Within this circle visualize the objective you seek and desire. The objective should be exact and definite.

• Now see the objective in absolute and vivid detail........I am now a channel for cosmic consciousness. I am a cosmic center for peace and harmony. I know that I am a spiritual image of the creative father, consisting of mind-body a soul.  I now claim my divine heritage and confirm my oneness with the infinite intelligence. I now aline my mind, body, and soul with cosmic consciousness. I am stirred to creative action to utilize my mystical gifts and talent to create something beautiful, helpful and enduring for all humanity My personality now becomes magnetized with dynamic cosmic power. I attuned my own higher brain center to the inexhaustible supply of the cosmic consciousness, I release the frozen assets of my higher brain center to elevate to supernal heights of revelation and wisdom.

I invite all visibly invisible masters/gurus/guides/mentors/healers mystical forces in my life to help and guide me on the path of the spiritual journey and show me the right path.

I am constantly radiating the vibrations of happiness, harmony, prosperity, smile, love, peace, goodness, beauty to everyone I meet in my personality, my word, and my actions.

• See within the circle of light the thing that you seek are being already accomplished. Believe that it is already yours.

• Speak now with full command “I command with all the power of my being that --- I am always radiating the vibrations of cosmic consciousness with the desire to heal, uplift, inspire, elevate and transform humanity. --- --- As I will it, it is done, it is settled.''

• You have invoked your divine power to create.

• Now thanks to your higher self for accomplishing your will.

• Perform the ritual at least once a day, until your goal is completely reached.

• Your higher self or the God within you will not let you down. Trust in it completely. Definitely, it will answer your dreams



Geeta Jha

Saturday, February 16, 2019

Košava sa Dunava ( Kosava from Danube )



Kosava from Danube (By Dara Bubamara )

डेन्यूब से चलने वाली ठंडी  हवा  कोसावा  ने 

तुम्हें मुझसे चुरा लिया है 

तुम्हारे  इंतज़ार में मेरी कमान जैसी भौं  के नीचे  जलाने  वाली लौ ने 

मेरे होठों की बर्फ को पिघला दिया है 


आह, कोसावा , मदमस्त बहो 

और काले बादलों का पीछा करो 

आह, कोसावा , मदमस्त बहो 

और हमारे कदमों को तेज़ गति  दो 


डेन्यूब से चलने वाली ठंडी  हवा  कोसावा  ने 

आज  रात  तुम्हें मुझसे दूर कर दिया है 

इन दो काली आँखों के चलते 

मेरे मन में कोई शांति नहीं  है 

और न ही मेरे मन में किसी सपने को देखने ख्वाहिश ही बची है !



Košava (Serbian CyrillicКошаваpronounced [kɔ̌ʃaʋa]) is a cold, very squally southeastern wind found in Serbia and some nearby countries. It starts in the Carpathian Mountains and follows the Danube northwest through the Iron Gate region where it gains a jet effect, then continues to Belgrade