Saturday, June 20, 2015

ज्योतिष में मानसिक अशांति के कारण


अपने  कार्यों में  अपेक्षानुरूप सफलता नहीं मिलने से अथवा किसी भी प्रकार की प्रतिकूल परिस्थितियों से सामना न कर पाने के कारण मन अशांत हो जाता है । अशांत मन अनेक प्रकार के मनोरोगों को जन्म देता है ।
ज्योतिष में मानसिक अशांति के मुख्य कारक
लग्न ---व्यक्तित्व
चतुर्थ भाव ---मानसिक स्थिति ,विचार
चन्द्रमा ---मन का कारक
ज्योतिष में मानसिक अशांति के कारण
  1. चन्द्रमा  नीच  राशि वृश्चिक में हो |
  2. चन्द्रमा का 6/8/12 वें  भाव में स्थित होना । 
  3. चन्द्रमा पर राहु एवं शनि की युति या दृष्टि हो  । दोनों में से एक ग्रह से युति हो और दूसरे की दृष्टि हो तब भी अशांत मन होने की संभवना बनी रहती है ।
  4. चन्द्रमा पाप ग्रहों के मध्य हो या पाप कर्तरी -योग में हो तब भी मानसिक पीड़ा मिलती है ।
  5. लग्न / लग्नेश  और चन्द्रमा दोनो निर्बल हो तो भी जातक को मनोविकार होते हैं ।
  6. चतुर्थ भाव विचारों का होता है । इस भाव पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव दूषित विचार उत्पन्न करते हैं जिनसे मनोविकार  होते हैं ।
  7. चन्द्रमा और चतुर्थ भाव  दोनों पीड़ित होने पर जातक को अपने विचारों पर नियंत्रण नहीं रहता है और वह मनोरोगी हो जाता है ।
  8. लग्न,सूर्य और चन्द्रमा पर राहु का प्रभाव हो तो जातक को अज्ञात कारणों से मानसिक पीड़ा होती है ।
बलवान मानसिक स्थिति के ज्योतिष कारण
  1. चन्द्रमा यदि केंद्र/त्रिकोण में बली स्थिति में हो तो जातक की मानसिक स्थिति बलवान होती है ।
  2. चन्द्रमा पर शुभ  ग्रहों का प्रभाव हो तो मानसिक विकार नहीं होते हैं ।
  3. चन्द्रमा और लग्नेश दोनों बली हों तो जातक भावात्मक रूप से बली होता है ।
  4. लग्न  और लग्नेश बली हों तो जातक अनुशासित  और संतुलित मानसिकता का होता है  ।
  5. सूर्य,चन्द्रमा और लग्न तीनों के बली होने पर जातक दृढ मानसिकता का होता है ।
  6. अक्सर शुभ ग्रहों की दशा में मनोस्थिति अच्छी ही रहती है ।

द्वारा
गीता झा 

No comments:

Post a Comment