Friday, January 8, 2016

कुण्डली में प्रेम विवाह के योग



भारत में विवाह को एक पवित्र धर्मिक एवं समाजिक संस्कार माना  गया है कुंडली में कुछ योगों की उपस्थित के चलते जातक या जातिका प्रेम विवाह करते हैं इन योगों के चलते माता-पिता , कुटुंब , जाति ,धर्मभाषा  ,देश, आर्थिक स्तर आदि की अक्सर अनदेखी भी की जाती है लड़के और लड़की एक दूसरे के प्रति आकर्षित होकर प्रेम  सम्बन्ध बना लेते हैं और फिर विवाह बंधन में भी बंध जाते हैं

प्रेम विवाह के कुछ योग

  1. लग्नेश एवं सप्तमेश  का स्थान परिवर्तन या  दोनों की युति सप्तम/लग्न में होना प्रेम विवाह का कारण बनता है ।
  2. पंचम भाव एवं सप्तम भाव की युति पंचम/सप्तम  में होना या दोनों में राशि परिवर्तन होना प्रेम विवाह का कारण बनता है ।
  3. पंचमेश और सप्तमेश का  दृष्टि सम्बन्ध भी प्रेम विवाह का योग बना देता है ।
  4. लड़कियों की कुंडली में गुरु का पाप प्रभाव में होना और लड़कों की कुंडली में शुक्र का पाप प्रभाव में होना प्रेम विवाह की सम्भावना को बढ़ा देता है ।
  5. राहू का लग्न में स्थित होना प्रेम विवाह का कारण बन सकता है यदि सप्तम भाव पर गुरु की दृष्टि न हो तो ।
  6. नवम भाव में धनु/मीन राशि हो तथा 7 वें भाव , नवम भाव एवं गुरु पर शनि/राहु की दृष्टि हो तो प्रेम विवाह होता है ।
  7. सप्तम भाव में राहु-मंगल की युति या मंगल एवं राहु के साथ सप्तम भाव का स्वामी वृष/तुला राशि में स्थित हो तो  प्रेम विवाह का योग बनता है ।
  8. चन्द्र-लग्न, सूर्य-लग्न एवं जन्म-लग्न से दूसरे भाव एवं दूसरे भाव के स्वामी का सम्बन्ध मंगल से हो तो भी प्रेम विवाह के योग बन सकते हैं ।
  9. कुंडली का दूसरा भाव पाप प्रभाव में हो , शुक्र कुण्डली में राहु /शनि के साथ बैठा हो और सप्तमेश का सम्बन्ध  शुक्र, चन्द्र एवं लग्न से हो । 
  10. शुक्र , चन्द्र लग्न से पंचम भाव में स्थित हो या जन्म लग्न से पंचम/नवम स्थित हो तो भी प्रेम विवाह हो सकता है ।
  11. चन्द्रमा और लग्नेश की युति लग्न में हो या  चन्द्रमा सप्तमेश के साथ सप्तम में हो तो भी प्रेम विवाह होता है ।
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By
Geeta Jha 

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